Supreme Court on Illegal Demolition: सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को ताक पर रखकर घरों को ध्वस्त करने पर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रयागराज विकास प्राधिकरण के को आड़े हाथों लिया. कोर्ट ने इस कार्रवाई को 'अमानवीय और अवैध' बताते हुए पीड़ितों को मुआवजा देने के आदेश दिए हैं.
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UP Government Bulldozer Action: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (1 अप्रैल) को उत्तर प्रदेश सरकार और प्रयागराज विकास प्राधिकरण को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर घरों को ध्वस्त करने पर कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से 'अमानवीय और अवैध' बताया. कोर्ट ने प्रयागराज में 2021 में हुए बुल्डोजर कार्रवाई को अवैध करार देते हुए सभी पांचों पीड़ितों को दस- दस लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने प्रयागराज में घरों ध्वस्त करने के मामले पर आदेश देते हुए कहा कि इस तरह के मामले अंतरात्मा को झकझोर देते हैं. कोर्ट ने कहा, "इस मामले में अपीलकर्ताओं के आवासीय परिसरों को जबरन ध्वस्त कर दिया गया है, जिस पर हमने विस्तार से चर्चा की है."
कोर्ट ने कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा, "अधिकारियों और खासकर विकास प्राधिकरण यह याद रखना चाहिए कि आश्रय का अधिकार (Right to Shelter) भारत के संविधान के आर्टिकल 21 का महत्वपूर्ण हिस्सा है."
साल 2021 में इलाहाबाद विकास प्राधिकरण ने प्रयागराज में एडवोकेट जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और तीन अन्य लोगों के घरों को ध्वस्त कर दिया था. जिसके बाद पीड़ितों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हालांकि, ध्वस्तीकरण को चुनौती देने वाली याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था.
मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण को घर के मालिकों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट अपने फैसले में कहा, "ध्वस्तीकरण की अवैध कार्रवाई संविधान के आर्टिकल 21 के तहत याचिकाकर्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है. इसलिए प्राधिकरण सभी याचिकाकर्ताओं को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दे."
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की प्रयागराज में कानूनी प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर कार्रवाई करने पर आड़े हाथों लिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बगैर घरों को तोड़ा गया है, यह हैरान करने वाला है और इससे गलत संदेश गया है.
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