Advertisement
trendingNow,recommendedStories0/zeesalaam/zeesalaam2749924
Zee SalaamIndian MuslimRohingya को जाना होगा अब अपने देश; सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार का दिया साथ!

Rohingya को जाना होगा अब अपने देश; सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार का दिया साथ!

Rohingya in India: रोहिंग्या पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट का कहना है कि उन्हें जीने का हक है, लेकिन वह भारतीय कानून के हिसाब से यहां नहीं रह सकते हैं. पूरी खबर पढ़ने के लिए स्क्रॉल करें.

Rohingya को जाना होगा अब अपने देश; सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र  सरकार का दिया साथ!

Rohingya in India: भारत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की कंडीशन एक बार फिर सुर्खियों में है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली से रोहिंग्या मुसलमानों के संभावित निर्वासन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इस फैसले के बाद यह बहस तेज हो गई है कि भारत में शरण लिए हुए रोहिंग्याओं का मुस्तकबिल क्या होगा.

क्या है पूरा मामला?

रोहिंग्या समुदाय की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर भारत में शरण देने और शरणार्थी का दर्जा देने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि म्यांमार में उन्हें हिंसा, उत्पीड़न और नरसंहार का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए भारत उन्हें सुरक्षित ठिकाना दिया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि भारत का संविधान केवल भारतीय नागरिकों को देश में रहने का अधिकार देता है. विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में भारत के कानूनों के मुताबिक ही कार्रवाई की जाएगी.

Add Zee News as a Preferred Source

वकीलों ने क्या दी दलीलें?

सीनियर वकील कोलिन गोंसाल्विस और प्रशांत भूषण ने दलील दी कि रोहिंग्याओं को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHCR) के जरिए शरणार्थी का दर्जा मिला है और उनके पास शरणार्थी कार्ड भी हैं, इसलिए उन्हें भारत में रहने की इजाजत मिलनी चाहिए. सरकारी पक्ष में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने साफ कहा कि भारत ने 1951 की यूएन शरणार्थी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इसलिए UNHCR की मान्यता भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि रोहिंग्या विदेशी नागरिक हैं और उनके मामलों में विदेशी अधिनियम के तहत ही कार्रवाई होगी.

अब क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की है. फिलहाल, अदालत ने कहा कि रोहिंग्या प्रवासियों को जीने का अधिकार मिल सकता है, लेकिन भारत में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है.

About the Author
author img
Sami Siddiqui

समी सिद्दीकी उप्र के शामली जिले के निवासी हैं, और 6 से दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे हैं. राजनीति, मिडिल ईस्ट की समस्या, देश में मुस्लिम माइनॉरिटी के मसले उनके प्रिय विषय हैं. इन से जुड़ी सटीक, सत्य ...और पढ़ें

TAGS

Trending news