)
Uttar Pradesh News Today: उत्तर प्रदेश समेत देश के दूसरे राज्यों में मुस्लिम नौजवान बगैर ट्रायल लंबे समय से जेलों में बंद हैं. कई पीड़ित तो ऐसे हैं कि जिनकी जमानत अर्जी कई बार खारिज हो चुकी है. मानवाधिकार संगठन, कानून के जानकार, देश की दिग्गज हस्तियों में शुमार लोगं का आरोप है कि इन नौजवानों को महज मजहब की वजह से कानूनी दांव पेंच का शिकार होना पड़ रहा है. इसको लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी की है.
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश एटीएस के जरिये आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार मोहम्मद कामिल की जमानत याचिका पर लखनऊ हाईकोर्ट को जल्द से जल्द सुनवाई करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदरेशऔर जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने सीनियर वकील गुरु अग्रवाल की दलीलों और तर्कों को सुनने के बाद यह आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि मोहम्मद कामिल की डिफॉल्ट जमानत याचिका पर मेरिट के आधार पर सुनवाई करे और याचिका दाखिल करने में हुई देरी को नज़रअंदाज़ करते हुए उचित फैसला सुनाए. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी की जाए.
मोहम्मद कामिल का मामला जमीयत उलमा-ए-हिंद की कानूनी सहायता समिति के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी की देखरेख में चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कामिल के लिए बड़ी राहत साबित हुई है, क्योंकि पिछले दो सालों से उनकी जमानत याचिका पर हाईकोर्ट सुनवाई नहीं कर रहा था. हाईकोर्ट ने कहा था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए सुनवाई नहीं की जा रही है.
मोहम्मद कामिल ने UAPA कानून की धारा 43(डी) और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 167(2) के तहत याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने तर्क दिया कि जांच एजेंसी ने 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की, इसलिए उन्हें डिफॉल्ट जमानत दी जाए. चूंकि कामिल ने विशेष अदालत के फैसले को 30 दिनों के भीतर चुनौती नहीं दी थी, इसलिए हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. इसके बाद कामिल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर आज महत्वपूर्ण सुनवाई हुई.
मोहम्मद कामिल के साथ गिरफ्तार अन्य आरोपियों पर यूपी एटीएस ने अल-कायदा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़ाव का गंभीर आरोप लगाया है. कामिल समेत दूसरे आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत दो साल पहले ही लखनऊ हाईकोर्ट ने मंजूर कर दी थी, लेकिन कामिल ने याचिका में देरी की थी. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उनकी याचिका सुनने से इंकार कर दिया था.
'इंकलाब' में छपी खबर के मुताबिक, अब सुप्रीम कोर्ट ने कामिल की जमानत याचिका पर सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया है. उम्मीद है कि लखनऊ हाईकोर्ट जल्द से जल्द उनकी याचिका पर सुनवाई कर फैसला देगा. मोहम्मद कामिल की याचिका सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड चांद करीशी ने दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान सीनियर वकील गुरु अग्रवाल के साथ एडवोकेट आरिफ अली, एडवोकेट मुजाहिद अहमद समेत कई अन्य वकीलों ने मदद की. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई अन्य मुस्लिम नौजनवानों के केस में नजीर बन सकता है.
मुस्लिम माइनॉरिटी की ऐसी ही खबरों के लिए विजिट करें https://zeenews.india.com/hindi/zeesalaam