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Supreme Court on Anti Conversion Laws: देश के बीजेपी शासित राज्यों में धर्मांतरण और लव जिहाद के नाम पर सबसे ज़्यादा सियासी रोटियां सेंकी गई हैं. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी कथित लव जिहाद को रोकने के लिए धर्मांतरण विरोधी कानून बनाया गया. इस कानून के तहत सैकड़ों मुस्लिम युवकों को लव जिहाद के आरोप में जेल में डाल दिया गया है. अब इस कानून को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकारों से जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले की सुनवाई 6 हफ्ते बाद होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह राज्यों से जवाब मिलने के बाद ही तय करेगा कि क्या धर्मांतरण विरोधी कानूनों के अमल पर रोक लगाई जाए या नहीं. कोर्ट यह भी विचार करेगा कि इस मसले पर देशभर की अलग-अलग हाई कोर्ट में चल रही याचिकाओं को एक साथ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए ट्रांसफर किया जाए या नहीं.
किसने दी इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
जमीयत उलेमा-ए-हिंद और सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस जैसे कई संगठनों ने धर्मांतरण विरोधी कानून को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये कानून अलग-अलग धर्मों से जुड़े जोड़ों को परेशान करने का जरिया बन गए हैं. उनका आरोप है कि इन कानूनों की आड़ में झूठे धर्मांतरण के आरोप लगाकर निर्दोष लोगों को फंसाया जा सकता है.
याचिकाकर्ताओं ने दी है ये दलील
सुप्रीम कोर्ट में जिन राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों को चुनौती दी गई है, उनमें उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक शामिल हैं. इन राज्यों में बने कानूनों को लेकर पहले से ही कई हाई कोर्ट में मामले लंबित हैं. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मुख्तलिफ 6 हाई कोर्ट में चल रहे केसों को सुप्रीम कोर्ट में लाकर एक साथ सुनवाई की जाए, ताकि इस मुद्दे पर एक समान निर्णय दिया जा सके.