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Umar Khalid Bail News: सुप्रीम कोर्ट सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साज़िश मामले में स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम समेत सात आरोपियों की ज़मानत याचिकाओं पर अपना फ़ैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है. वहीं, गुलफ़िशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा-उर-रहमान, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम को जमानत दे दी है.
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर पब्लिश हुई कॉजलिस्ट के मुताबिक, जस्टिस अरविंद कुमार और प्रसन्ना बी. वराले की बेंच सोमवार को फ़ैसला सुनाएगी. सलीम खान, जिस पर कड़े UAPA के तहत आरोप हैं, पांच साल से ज़्यादा समय से कस्टडी में है. इससे पहले 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दंगों के "बड़ी साज़िश" मामले में आरोपियों को ज़मानत देने से दिल्ली हाई कोर्ट के इनकार को चुनौती देने वाली स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) के बैच पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.
दोनों पक्षों ने दी ये दलील
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस कुमार की अगुवाई वाली बेंच ने पिटीशनर और प्रॉसिक्यूशन को 18 दिसंबर तक अपनी दलीलों के सपोर्ट में कोई भी एक्स्ट्रा डॉक्यूमेंट फाइल करने का निर्देश दिया. ज़मानत याचिकाओं का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि हिंसा कोई अचानक हुई सांप्रदायिक झड़प नहीं थी, बल्कि देश की आज़ादी पर एक "अच्छी तरह से डिज़ाइन किया गया, अच्छी तरह से तैयार किया गया, ऑर्गेनाइज़्ड और पहले से प्लान किया गया" हमला था.
सॉलिसिटर जनरल ने क्या दिया तर्क
सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया था, "यह हिंसा का कोई अचानक हुआ काम नहीं था. यह देश की आज़ादी के खिलाफ हमला था." भाषणों, WhatsApp चैट और दूसरी चीज़ों का हवाला देते हुए "समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की साफ और साफ कोशिश" का दावा किया था. उन्होंने तर्क दिया था कि ट्रायल की कार्रवाई में देरी आरोपियों की वजह से हुई क्योंकि वे "सहयोग नहीं कर रहे थे" और "उनमें से हर एक ने आरोप तय करने का विरोध करने के लिए 4-5 दिन तक बहस की."