Tablighi Jamaat Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने निजामुद्दीन मरकज में 2020 कोविड लॉकडाउन के दौरान विदेशी नागरिकों से जुड़े तब्लीगी जमात मामले में फैसला सुरक्षित रखा.
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Tablighi Jamaat Case: देश की राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन में मौजूद मरकज में मार्च 2020 में तब्लीगी जमात का आयोजन किया गया था. इस आयोजन में विदेशों से भी मुसलमान शामिल होने आए थे. इसी दौरान भारत समेत कई देशों में कोविड ने दस्तक दे दी और देश में लॉकडाउन लगा दिया गया. इसके बाद जो लोग जहां थे वहीं फंस गए.
इस बीच मरकज में मौजूद एक शख्स को कोविड हो गया, जिसके बाद हिंदू संगठन के लोगों ने तब्लीगी जमात के खिलाफ समाज में जहर फैला दिया. हिंदू संगठनों ने दावा किया कि मरकज में विदेशी नागरिकों को पनाह दी गई थी और वहीं से कोविड फैला. यह मामला इतना तुल पकड़ा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को दखल देना पड़ा और इस मामले में दिल्ली पुलिस ने मरकज से जुड़े लोगों पर 2020 के कोविड-19 प्रकोप के दौरान विदेशी नागरिकों शरण देने के इल्जाम में मुकदमा दर्ज कर लिया. इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में हो रही थी. वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पुरी हो चुकी है और कोर्ट ने दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
अधिवक्ता आशिमा मंडला उन भारतीय नागरिकों की ओर से पेश हुईं जिनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता, महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम और विदेशी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थीं. उन्होंने घटना के संबंध में अन्य अदालतों द्वारा पारित निर्णयों का संकलन रिकॉर्ड पर रखा. याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता मंदाकिनी सिंह भी पेश हुईं. जस्टिस नीना बंसल की पीठ ने तब्लीगी जमात से जुड़े 70 भारतीय नागरिकों से जुड़े 16 एफआईआर के बैच मामले में फैसला सुरक्षित रखा, जिन पर 24 मार्च, 2020 से 30 मार्च, 2020 के बीच कोविड-19 प्रकोप के दौरान मुख्तलिफ मस्जिदों में विदेशी नागरिकों को शरण देने के लिए आईपीसी की धारा 188/269/270/120-बी के तहत आरोप पत्र दायर किया गया था.
195 विदेशी नागरिकों के खिलाफ मामला दर्ज
इस मामले भारतीय नागरिकों समेत 195 विदेशी नागरिकों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ था. लेकिन बाद में जब पुलिस ने चार्जशीट यानी आरोप तय किए, तो इन विदेशी नागरिकों में से ज्यादातर के खिलाफ आरोप नहीं तय किए गए, या फिर अदालत ने उनके खिलाफ केस चलाने से इनकार कर दिया. क्योंकि कानून के Double Jeopardy सिद्धांत के तहत, किसी व्यक्ति पर एक ही अपराध के लिए दो बार मुकदमा नहीं चलाया जा सकता.
दिल्ली पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया था मुकदमा
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने कोविड-19 प्रकोप के दौरान कथित उल्लंघन के संबंध में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम और विदेशी अधिनियम की मुख्तलिफ धाराओं के तहत भारतीय और विदेशी नागरिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. कई आरोपपत्र दायर किए गए, जिसमें कई विदेशी नागरिकों ने दलीलें पेश कीं.
193 के खिलाफ 28 मुकदमे दर्ज
इसके अलावा, दिल्ली भर में 193 व्यक्तियों के खिलाफ 28 मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके कारण दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाएं खारिज कर दी गईं. जिन लोगों पर केस किया गया है, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की कानूनी वैधता (Legal Validity) पर सवाल उठाए गए हैं. खासकर आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की उन धाराओं को लेकर, जिनके लिए कुछ खास कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है लेकिन इन मामलों में वो जरूरी प्रक्रिया ठीक से नहीं अपनाई गई, और ज्यादा मजबूत सबूत भी नहीं मिले. इसी वजह से भारत के कई हिस्सों की अदालतों ने ऐसे ही मामलों को पहले भी खारिज कर दिया है.