Samrat Vikramaditya University Exam Paper Row: उज्जैन की सम्राट विक्रमादित्य यूनिवर्सिटी के फाउंडेशन कोर्स एग्जाम में पूछे गए एक धार्मिक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया. सोशल मीडिया पर पेपर वायरल होने के बाद हिंदूवादी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, इसके बाद प्रशासन ने सवाल को पेपर से हटा दिया.
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Madhya Pradesh University News: मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक परीक्षा का सवाल इन दिनों बड़े विवाद की वजह बन गया है. आमतौर पर परीक्षा का पेपर बच्चों की क्षमता परखने की होती है, कि उन्होंने क्या सीखा. लेकिन इस बार एक सवाल ने न सिर्फ छात्रों को हैरान किया, बल्कि पूरे शहर में बहस और विरोध की स्थिति पैदा कर दी. यह पेपर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
पूरा मामला उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य यूनिवर्सिटी का है, जहां बीकॉम, बीबीए और कंप्यूटर साइंस के थर्ड ईयर के छात्रों के लिए आयोजित फाउंडेशन कोर्स की परीक्षा थी. इस परीक्षा कथित रूप से धार्मिक रूप से संवेदनशील सवाल पूछा गया. यह विवाद पेपर के प्रश्न नंबर 45 को लेकर खड़ा हुआ, जिसमें हिंदी में लिखा था, "अल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं है." इसके साथ चार ऑप्शन दिए गए थे, सोमेश्वर, खुदा, शक्तिवान और दर्द देने वाला.
इस सवाल पर विवाद तब शुरू हुआ, जब एक छात्र ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए परीक्षा का पेपर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. इसके बाद प्रश्नपत्र की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई. इसके बाद मामला तूल पकड़ने लगा. कई लोगों ने इस सवाल को लेकर आपत्ति जताई और इसे एक विशेष धर्म की ओर झुकाव दिखाने वाला बताया.
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वहीं, कुछ हिंदुत्व संगठनों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर आरोप लगाया कि इस तरह के सवालों के जरिए एक धर्म विशेष को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की. उज्जैन के कई इलाकों में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए, जहां कुछ नेताओं ने इसे सोची-समझी साजिश करार दिया और धमकी दी कि अगर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
मामला तूल पकड़ता देख यूनिवर्सिटी प्रशासन प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप किया और मामले को एग्जामिनेशन कमेटी पास भेज दिया. सम्राट विक्रमादित्य यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि एग्जामिनेश कमेटी ने पेपर के भाषा और कल्चर सेक्शन की समीक्षा की. जांच में पाया गया कि यह सवाल निर्धारित सिलेबस का हिस्सा नहीं था और इसे पेपर सेट करने वाले शख्स ने अपने स्तर पर जोड़ा था.
जांच रिपोर्ट के आधार पर यूनिवर्सिटी प्रशान ने संबंधित पेपर सेट करने वाले को नियमों के उल्लंघन के लिए नोटिस जारी करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है. साथ ही, विवादित सवाल को मूल्यांकन प्रक्रिया से पूरी तरह हटा दिया गया है. छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी ने यह भी फैसला लिया है कि कॉपियों की जांच बाकी प्रश्नों के आधार पर की जाएगी और सभी छात्रों को एक अतिरिक्त अंक दिया जाएगा, ताकि किसी के नतीजे प्रभावित न हो.
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