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Umar Ansari Case: मऊ के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी को मंगलवार शाम कासगंज जेल से रिहा कर दिया गया. उमर को 14 अगस्त को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था और बाद में 23 अगस्त को उन्हें कासगंज जेल शिफ्ट किया गया था. हाल ही में हाई कोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर ली थी. जमानत की कागजी कार्रवाई पूरी होने और दस्तावेजों की जांच के बाद ही उनकी रिहाई संभव हो पाई.
सपा सांसद अफजाल अंसारी के भतीजे और विधायक अब्बास अंसारी के भाई उमर अंसारी को करीब 39 दिन जेल में गुजारने के बाद जेल से रिहाई मिली है. उमर के जेल परिसर से बाहर निकलने के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे. इस दौरान उनके भाई अब्बास अंसारी की बीवी निखहत अंसारी भी मौके पर मौजूद थीं.
उत्तर प्रदेश में अगले साल के शुरू में पंचायत चुनाव होने हैं. ऐसे में उमर अंसारी का जेल से बाहर आना अंसारी परिवरा के लिए कई मायनों में अहम है. उमर अंसारी के खिलाफ मोहम्मदाबाद थाने में 14 अगस्त को फर्जी दस्तखत करने के मामले में केस दर्ज किया गया था. उसी दिन गाजीपुर पुलिस ने उमर अंसारी को गिरफ्तार लखनऊ स्थित एमएलए आवास से गाजीपुर ले आई थी. बाद में उन्हें मीडिया के सामने पेश कर जेल भेज दिया था.
इस दौरान उमर के परिवार ने आरोप लगाया था कि जेल में उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई. इन आरोपों के बाद 23 अगस्त को उमर अंसारी को गाजीपुर जेल से कासगंज जेल ट्रांसफर कर दिया गया. पुलिस का आरोप है कि उमर अंसारी अपने परिवार की जब्त की गई संपत्तियों को बचाने के लिए फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी का सहारा ले रहे थे.
पुलिस ने उमर अंसारी पर अपनी मां अफशां अंसारी के फर्जी दस्तखत कर अदालत में दस्तावेज दाखिल करने का आरोप लगाया है. इसी मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी. गाजीपुर पुलिस का यह भी मानना है कि उमर अंसारी आईएस 191 गैंग के एक्टिव मेंबर हैं. उनके खिलाफ गाजीपुर, मऊ और लखनऊ जिलों में कई केस दर्ज हैं.
इन मामलों में फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन पर कब्जा करने, चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने और माहौल खराब करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि भले ही उमर अंसारी को जमानत पर रिहाई मिल गई हो, लेकिन उमर अंसारी की सरगर्मियों पर लगातार नजर रखी जाएगी और दर्ज मामलों की जांच जारी रहेगी.
उमर अंसारी, पूर्वांचल में अंसारी परिवार की सियासत के वारिस माने जाते हैं. गाजीपुर-मऊ में पिछड़े वर्गों और गरीबों में उनकी मजबूत छवि है. उत्तर प्रदेश में अगले साल पंचायत चुनाव और फिर 2027 में विधानसभा चुनाव है. पंचायत चुनाव को यूपी विधानसभा चुनाव का सेमी फाइनल माना जाता है. वर्तमान में अंसारी परिवार से अफजाल अंसारी सांसद और अब्बास अंसारी विधायक हैं.
मऊ में कुल 684 ग्राम पंचायत है, जबकि गाजीपुर के 16 ब्लॉकों में 1238 ग्राम पंचायतें हैं. गाजीपुर और मऊ को मिलाकर कुल 11 विधानसभा सीटें हैं, जो किसी भी पार्टी को सत्ता में कुर्सी हासिल करने में अहम हैं. उमर अंसारी के जेल से बाहर आने के बाद अंसारी परिवार के समर्थकों की उन पर नजर है. यही वजह है कि उमर अंसारी के जेल से छूटने पर उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई.