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Umar Khalid Hearing: फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए (UAPA) मामले में उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की मांग करते हुए कहा कि उनके खिलाफ न तो किसी हिंसा में शामिल होने का सबूत है और न ही किसी साजिश का.
सीनियर अधिवक्ता कपिल सिब्बल, जो खालिद की ओर से न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ के सामने पेश हुए, ने दलील दी कि कुल 751 एफआईआर में से मेरे खिलाफ केवल एक है. अगर इसे साजिश कहा जा रहा है, तो यह अपने आप में हैरान कर देने वाला है. उन्होंने यह भी बताया कि दंगों के दौरान खालिद दिल्ली में मौजूद नहीं थे और उनके पास से न कोई पैसा, न हथियार, और न ही कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई.
सिब्बल ने आगे कहा, "कोई भी गवाह उन्हें हिंसा से जोड़ता नहीं है." उन्होंने बताया कि खालिद का मामला नताशा नरवाल, देवांगना कलीता और आसिफ इकबाल तन्हा जैसे कार्यकर्ताओं से मेल खाता है, जिन्हें 2021 में जमानत दी गई थी.
उन्होंने कहा कि 17 फरवरी 2020 को अमरावती में उमर खालिद का भाषण, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रोवोकेटिव कहा था, दरअसल गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित एक पब्लिक स्पीच थी, जो अब भी यूट्यूब पर उपलब्ध है.
गुलफिशा फातिमा के मामले में, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्हें अप्रैल 2020 से हिरासत में रखा गया है, यानी पांच साल पांच महीने बीत चुके हैं. मुख्य चार्जशीट सितंबर 2020 में दाखिल हुई थी, लेकिन हर साल नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर प्रक्रिया को लंबा किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि फातिमा की जमानत याचिका 90 से अधिक बार लिस्ट की गई है, पर सुनवाई पूरी नहीं हुई. उन पर केवल एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का आरोप है, लेकिन अदालत के मानकों के मुताबिक यह हिंसा भड़काने की मंशा साबित नहीं करता.
इसी तरह, शरजील इमाम के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि इमाम पिछले पांच साल में तीन साल तक जांच का सामना कर चुके हैं. उनके भाषण दंगों से दो महीने पहले दिए गए थे, जिनका दंगों से कोई सीधे तौर पर रिश्ता नहीं है.
वहीं, दिल्ली पुलिस ने सभी जमानत याचिकाओं का विरोध किया. पुलिस का कहना है कि इन कार्यकर्ताओं ने सरकार बदलने की साजिश के तहत आंदोलन को हिंसा में बदला और देश की संप्रभुता को खतरे में डाला.
उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और मीरान हैदर पर यूएपीए और आईपीसी की धाराओं में केस दर्ज है. फरवरी 2020 के दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे. ये घटनाएं सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थीं.