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Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंउम्मुल मोमिनीन पर उठा विवाद, यह हैं पैगंबर (स.अ.) की 12 बीवियां, जिनके बारे में जानना है जरूरी

'उम्मुल मोमिनीन' पर उठा विवाद, यह हैं पैगंबर (स.अ.) की 12 बीवियां, जिनके बारे में जानना है जरूरी

Prophet Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam Wives: राजनाथ सिंह के बयान से शुरू हुआ विवाद पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.) की बीवियों और उनके विशेष दर्जे पर एक नई बहस में बदल गया है. कुरआन, हदीस और इस्लामी इतिहास के आधार पर पता चलता है कि नबी (स.अ.) के निकाह का मकसद औरतों को सशक्त बनाने, सामाजिक, आर्थिक समानता देने और इंसानी भलाई के मकसद से जुड़े हुए थे. इस लेख में आइये जानते नबी (स.अ.) की बीवीयों के नाम और उनके इतिहास, जिन्हें इस्लाम में 'अज़वाज मुतहरात' कहा गया है. 

 

(फाइल फोटो)
(फाइल फोटो)

Prophet Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam Wife Names: केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में संसद सत्र के दौरान 8 दिसंबर 2025 को लोकसभा में वंदे मातरम के समर्थन में एक विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने इस्लामिक शब्दावली का सहारा लेते हुए वंदे मातरम को "उम्मुल मोमिनीन" (पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द यानी मुस्लिम महिलाओं की मां) और "उम्मुल किताब" (किताब की मां) से जोड़ा. उनके इस बयान से विवाद खड़ा हो गया. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस बयान की कड़ी निंदा की है, और इसके जवाब में सही तथ्य पेश किए है. 

राजनाथ सिंह के विवादित बयान के बाद पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी और उनकी बीवियों को लेकर नए सिरे से बहस शुरू हो गई. न सिर्फ मुसलमानों बल्कि गैर-मुस्लिमों के मन में भी यह जिज्ञासा उठी कि आखिर पैगंबरे रसूल की कितनी बीवियां थी और उनकी एक से ज्यादा शादी करने का क्या मकसद था? मुस्लिम उलेमा में पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवीयों की संख्या को लेकर विवाद रहा है. लेकिन आज कुरआन, हदीस में दिए गए तथ्यों के आधार पर इस बात को समझेंगे. 

इस्लाम में पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवीयों को खास मुकाम हासिल है, यानी उन्हें आम औरतों जैसा नहीं माना जाता है. कुरआन में उनका दर्जा साफ तौर पर बाकी औरतों से अलग बताया गया है. इस्लाम में नबी (स.अ.) की बीवीयां मुस्लिम औरतों के लिए आदर्श हैं. इस्लाम में उन्हें 'उम्महातुल मोमिनीन' यानी ईमान वालों की मां कहकर सम्मान दिया जाता हैं. इसके अलावा उन्हें 'अज़वाजे मुतहरात' यानी नबी (स.अ.) की पाक और आदर्श बीवीयां भी कहते हैं.

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कुरआन की सूरह अहजाब में कहा गया है कि पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवीयां साधारण औरतें नहीं हैं और उनका आचरण पूरी उम्मत के लिए मिसाल है. यही वजह है कि उनके लिए खास हिदायतें भी तय की गईं, जैसे गलत काम की स्थिति में दोहरी सजा और पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद उनसे निकाह पर पूरी तरह रोक. इस विशेष दर्जे का मतलब था कि उन्हें पूरे समाज की मां जैसा सम्मान दिया जाए. खास बात यह है कि नबी (स.अ.) की ज्यादातर बीवीयां विधवा थीं. नबी (स.अ.) ने विधवा औरतों से शादी इसलिए की, ताकि उन्हें समाज में सम्मानित जिंदगी मिले और उनके उम्मती इस पर अम्ल कर अबला और विधवा औरतों से शादी कर उन्हें बेहतर जिंदगी दे सके.  उन्होंने ज़्यादातर ऐसी औरतों से निकाह किया, जिनके पहले शौहर का इंतकाल हो चुका था या फिर तलाकशुदा औरतें थी. पैगम्बर (स.) की अधिकांश बीवियों की मौत कम उम्र में ही हो जाती थी, जिसकी वजह से वो किसी अन्य तलाकशुदा या विधवा महिला से विवाह करते थे. एक साथ उनके निकाह में अधिकतम कितनी बीवियां थी, इतिहासिक दस्तावेजों में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है. 

कौन थीं पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की 12 बीवीयां?

1. खदीजा (रजि.)- सबसे पहली बीवी और सबसे पहला सहारा

खदीजा (रजि.) वह मुबारक हस्ती हैं जिन्हें पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पहली बीवी, पहला सहारा और पहली सच्ची हमदर्द होने का सम्मान हासिल है. व्यापार की दुनिया में उनका रुतबा बेहद बुलंद था. एक ऐसी सम्मानित, समझदार और कामयाब औरत, जिनकी ईमानदारी और उदारता मिसाल थी. जब पूरी दुनिया ने पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का विरोध किया, सबसे पहले ईमान लाने वाली वही थीं.

उनके मकाम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिब्रील (अलैहिस्सलाम) खुद पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आए और खदीजा (रजि.) को जन्नत की खुशखबरी देने का हुक्म अल्लाह तआला की तरफ से लेकर आए. पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज्यादातर औलाद भी खदीजा (रजि.) ही से हुई. 

2. सौदा (रजि.)- खदीजा (रजि.) के इंतकाल के बाद सहारा बनीं

सौदा (रजि.) वह मुबारक हस्ती हैं जिन्होंने खदीजा (रजि.) के इंतकाल के बाद पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी में एक नया सहारा बनकर कदम रखा. वह विधवा थीं और मक्का के सबसे मुश्किल, सबसे तकलीफदेह दौर में नबी (स.अ.) ने उनसे निकाह किया. एक ऐसा वक्त जब मुसलमानों पर अत्याचार बढ़ रहे थे और हर तरफ तकलीफों का साया था.

सौदा (रजि.) का स्वभाव बेहद सादा, दिल बेहद साफ और नेक थीं. वह नबी (स.अ.) के घर में आलिमें इंसानियत के लिए एक मिसाल बनकर रहीं. उनकी सादगी इतनी गहरी थी कि आज भी उनका जिक्र के साथ दिल में एक नर्म एहसास पैदा होता है. नबी (स.अ.) की सौदा (रजि.) से शानी पहली बीवी के इंतकाल के बाद किया था. उनका इंतकाल सन् 54 हिजरी में हुआ, जबकि कुछ लोग मौत उमर (रजि.) के खिलाफ के अंतिम दौर में मानते हैं 

3. आइशा (रजि.) - इल्म की सबसे बड़ी हस्ती
आइशा (रजि.) का मुकाम इस्लाम में कई मायनों में खास है. इसकी वजह है यह है कि वह हजारों हदीसों की राविया थीं. पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घरेलू जिंदगी और आदतों की सबसे विश्वसनीय गवाह थी. मुस्लिम इतिहास की सबसे ज्ञानवान औरतों में शुमार होता है. आइशा (रजि.) का सन् 57 हिजरी में इंतकाल हो गया और उनको सऊदी अरब में बकीअ नाम की जगह पर तद्फीन किया गया.

4. हफ़्सा (रजि.)  

हफ़्सा (रजि.) को कुरआन के शुरुआती लिखित हिस्सों की हिफाजत करने का सौभाग्य हासिल है.  हजरत हफ़्सा (रजि.), पैगंबइर इस्लाम के सबसे करीबी और विश्वसनीय लोगों में से एक हजरत उमर फारूक (रजि.) की बेटी थीं. उनके पहले शौहर बद्र के जंग में शहीद हो गए थे, जिसके बाद उनका निकाह नबी (स.अ.) से हुआ.

हफ़्सा (रजि.) की इबादत इतनी मशहूर थी कि जब एक बार नबी (स.अ.) ने उन्हें तलाक दिया, तो जिब्रील अलैहिस्सलाम खुद हाजिर हुए और कहा कि तलाक वापस ले लें. इसकी वजह थी 'हफ़्सा (रजि.) रातों में नमाज पढ़ने वाली और खूब रोजे रखने वाली नेक बीवी हैं और जन्नत में भी आपकी साथी होंगी.' इस घटना के बाद नबी (स.अ.) ने तलाक से रुजू कर लिया. 41 हिजरी में उनका इंतकाल हुआ और वे उम्महातुल मोमिनीन में एक महत्वपूर्ण नाम के रूप में हमेशा याद की जाती हैं.

5. ज़ैनब बिन्ते खुजैमा (रजि.)- 'मिस्कीनों की मां'

जैनब (रज़ि.) खुजैमा बिन हारिस की बेटी थीं और अपनी रहमदिली की वजह से अरब समाज में 'उम्मुल मसाकीन' के नाम से मशहूर थीं. उनके पहले शौहर उबैदा बिन हारिस बद्र के महान जंग में अल्लाह की राह में शहीद हो गए. शौहर की शहादत और अकेलेपन के बाद नबी (स.अ.) ने उनकी तकलीफ और हालात को देखते हुए उनसे निकाह किया, ताकि उन्हें सहारा और इज्जत भरी जिंदगी मिल सके.

हालांकि, अल्लाह को कुछ और ही मंजूर था. निकाह के सिर्फ चार महीने बाद, सन 4 हिजरी में जैनब (रजि.) दुनिया से रुख्सत हो गईं. उनका समय बहुत कम था, मगर उनकी नेकी, सहानुभूति और नर्मदिल स्वभाव ने एक गहरी छाप छोड़ दी, जो आज भी मोहब्बत और एहतराम के साथ याद की जाती है.

6. उम्मे-सलमा (रजि.)

उम्मे सलमा (रजि.) एक समझदार, साहसी और ईमानदार महिला थीं. उनके शौहर अबू सलमा बिन अब्दुल असद की मौत के बाद वे तीन बच्चों की मां होकर अकेली रह गईं. सन 4 हिजरी में पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे निकाह किया ताकि उन्हें सहारा मिले और उनकी जिंदगी स्थिर हो सके.

उम्मे सलमा (रज़ि.) का निकाह सिर्फ एक घर की जिम्मेदारी उठाना नहीं था बल्कि इस्लाम के संदेश को उन खानदानों तक पहुंचाने का भी जरिया बना, क्योंकि अरब में विवाह रिश्तों को मजबूत कर देता था और पूरा परिवार उस रिश्ते की मदद करता था. वे अपनी समझदारी, गहरी फिक्र और बेहतरीन सलाह के लिए मशहूर थीं. 59 हिजरी में उनका इंतकाल हुआ और उन्हें भी जन्नतुल बकीअ में दफ्न किया गया.

7. जैनब बिन्ते जहश (रजि.) 

जैनब (रजि.) पहले नबी (स.अ.) के लेपालक बेटे जैद (रजि.) के निकाह में थीं, लेकिन तलाक के बाद अल्लाह के हुक्म से उनका शादी नबी (स.अ.) से कराया गया. इस निकाह ने उस अरब परंपरा को खत्म किया जिसमें लेपालक बेटे की पहली बीवी से शादी को गलत माना जाता था. जैनब (रजि.) कहा करती थीं, "लोगों का निकाह उनके घर वाले करते हैं, मेरा निकाह अल्लाह ने किया." नबी (स.अ.) ने बताया था कि उनकी बीवीयों में सबसे ज्यादा दान करने वाली सबसे पहले उनसे मिलेगी और वह जैनब (रजि.) थीं. उनकी मौत 20 हिजरी में हुआ.

8. जुवैरिया (रजि.)

हारिस बिन अबी जरार की बेटी जुवैरीया (रजि.) का निकाह पहले सफवान बिन जी शकर से हुआ था. उनकी मौत के बाद नबी (स.अ.) ने 6 हिजरी में उनसे शादी की, जिसने पूरे कबीले को एक सूत्र में पिरोने का काम किया. जुवैरिया (रजि.) का मौत 56 हिजरी में हुई. इनकी शादी को लेकर कई ऐतिहासिक घटनाएं हैं. जिसका इस्लाम के फैलने में खास भूमिका निभाई.

9. उम्मे-हबीबा (रजि.)

उम्मे हबीबा (रजि.) मक्का के सरदार अबू-सुफियान की बेटी थीं. उनके पहले शौहर उबैदुल्लाह बिन जहरा हब्शा में ईसाई हो गए और वहीं उनकी मौत हो गई. इसके बाद हब्शा के राजा नजाशी ने चार सौ दीनार महर में नबी (स.अ.) का निकाह उम्मे हबीबा से कराया. उनके वालिद अबू-सुफयान ने इसे स्वीकारते हुए नबी (स.अ.) की महानता का जिक्र किया. उम्मे हबीबा (रजि.) का निधन 44 हिजरी में हुआ, उस समय उनके भाई मुआविया मुसलमानों के खलीफा थे.

10. सफीया (रजि.) 

सफीया (रजि.) यहूदियों के सरदार हुई बिन अख़्तब की बेटी थीं और खैबर के जंग में कैद होकर आईं. उनके पहले शौहर कनाना की जंग में मौत के बाद पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे निकाह किया. वह बहुत ही बुद्धिमान और समझदार थी. एक बार हफ़्सा (रजि.) के ताने से दुखी होने पर नबी (स.अ.) ने उन्हें दिलासा देते हुए बताया कि वे नबी की बेटी, नबी की भतीजी और अब नबी की बीवी हैं, इसलिए किसी को इस पर घमंड नहीं होना चाहिए. सफीया (रजि.) की मौत 50 हिजरी में हुआ और उन्हें जन्नतुल बकीअ में दफ्न किया गया.

11. मैमूना (रजि.)

मैमूना (रजि.) की पहले दो शादियां, तलाक और शौहर के मौत के वजह से टूट गईं. इसके बाद साल 7 हिजरी में उनका निकाह पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हुआ.  उनका इंतकाल 61 हिजरी, 80 साल की उम्र में हुआ. मैमूना (रजि.) को मक्का के पास सरिफ़ नाम की जगह में दफ्न किया गया. नबी (स.अ.) की बीवीयों में सबकी अपनी खूबियां थी. मैमूना (रजि.) बहुत नेक, मेहमाननवाज थीं. उनके निकाह के बाद कई कबीले मुसलमानों के करीब हुए.

12. मारिया क़िब्तिया (रजि.) 

मारिया क़िब्तिया (रज़ि.) शमऊन मिस्त्री की बेटी थीं और अपनी सुंदरता व शालीनता के लिए मशहूर थीं. उन्हें इस्कंदरिया के नवाब ने नबी (स.अ.) के लिए तोहफे में भेजा था. नबी (स.अ.) को उनसे बहुत मोहब्बत थी, क्योंकि वे उनके बेटे इब्राहीम की मां थीं, जिनकी बचपन में ही मौत हो गई थी. मारिया (रजि) की मौत 14 हिजरी में हुआ और उन्हें जन्नतुल बकीअ में दफ्न किया गया. वे नबी (स.अ.) की बारह सम्मानित बीवीयों में से एक थीं.

इस्लामी जगत में पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवीयों की संख्या को लेकर हमेशा से विवाद रहा है. लेकिन ऐतिहासिक रूप से इस्लामी किताबों में रेहाना बिन्त जैद नाम की बीवी का भी जिक्र मिलता है. वह बनू कुरैजा नाम के यहूदी की बेटी थीं और इस्लाम अपना लिया था. उनकी मौत 10 हिजरी के आस पास बताई जाती है. इसी तरह इतिहास में कुछ और औरतों का भी उल्लेख मिलता है, जैसे आलिया बिन्त जमआन, उमैमा बिंत नोमान, खौला बिंत हुजैल, अम्रा बिंत जैद, लेकिन ये या तो नबी (स.अ.) के घर आने से पहले ही तलाकशुदा हो गईं या उनका इंतकाल हो गया था.

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Raihan Shahid

रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू...और पढ़ें

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