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Uttar Pradesh News: यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार 2017 में सत्ता में आने के बाद से ही उर्दू नामों वाले शहरों, मोहल्लों, रेलवे स्टेशनों और प्रशासनिक शब्दावली में लगातार बदलाव कर रही है. प्रदेश की दक्षिणपंथी सरकार का दावा है कि यह नाम ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के मुताबिक नहीं थे बल्कि मुगल और इस्लामी शासनकाल के प्रभाव में रखे गए थे. वहीं, विपक्ष इसे सांप्रदायिक सियासत और ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताता है.
साल 2024 में प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में मुसलमानों के शिक्षम संस्थानों और धार्मिक स्थलों पर भी योगी सरकार ने बुलडोजर कार्रवाई की है. इन कार्रवाईयों की निष्पक्षता पर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं. शुक्रवार (28 नवंबर) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर जिले के 'फाजिलनगर' जिला पंचायत का नाम बदलकर 'पावा नगरी' करने का ऐलान किया. इसके बाद 'नाम बदलने की सियासत' को लेकर फिर से सियासी तूफान खड़ा हो गया.
ऑफिशियल और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक 50 से ज्यादा नामों को बदला जा चुका है. इनमें से ज्यादातर नाम मुस्लिम या उर्दू मूल के बताए जाते हैं. सरकार इसे 'ऐतिहासिक पुनर्स्थापना' बताती है, जबकि विरोधी दल इसे 'नाम बदलने की सियासत' और धुव्रीकरण की सियासत करने के आरोप लगाते रहे हैं.
साल 2017 से 2025 के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक नामों में बदलाव किए हैं. इसमें 20 से ज्यादा शहरों, कस्बों और जिलों के नाम शामिल हैं, जैसे फैजाबाद को अयोध्या और मुगलसराय को पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर किया गया. कुशीनगर के फाजिलनगर का नाम बदलकर पावा नगरी करने की प्रक्रिया भी जारी है. काशी में भी लगभग 50 मुस्लिम नाम वाले इलाकों के नाम बदले जा चुके हैं.
रेलवे स्टेशनों में 8 बदलाव दर्ज किए गए हैं. जिनमें इलाहाबाद जंक्शन को प्रयागराज, फैजाबाद को अयोध्या कैंट और साहिबाबाद को मोहन नगर नाम दिया गया. इसी तरह 15 से ज्यादा सड़कें और बाजारों के नाम बदले जा चुके हैं. इसमें सीएम ने अपने गृह जिले गोरखपुर में उर्दू बाजार को हिंदी बाजार, हुमायूंपुर को हनुमान नगर और मीना बाजार को माया बाजार कर दिया है.
प्रशासनिक और कानूनी शब्दावली में भी 10 से ज्यादा उर्दू-फारसी शब्द हटाए गए हैं, जिनमें मीरास को विरासत और वसीयत को वसीयतनामा किया गया. सरकार की नजर अब 392 मुगलकालीन नामों की उस लिस्ट पर भी है, जिन पर आगे और बदलाव की संभावना बनी हुई है.
योगी आदित्यनाथ सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम या उर्दू मूल के नामों को बदलना भारतीय संस्कृति और इतिहास को सही स्वरूप में दिखाने की पहल है. सरकार के मुताबिक, कई स्थानों के नाम मुगल शासनकाल में बदल दिए गए थे, जिससे भारतीय सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हुई. सरकार का दावा है कि जिन नामों को बदला जा रहा है, उनमें ज्यादातर अपने प्राचीन नामों के पुनर्जीवित स्वरूप हैं, इसलिए यह कदम सांस्कृतिक विरासत के पुनरुद्धार का हिस्सा है.
वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को पूरी तरह अलग नजरिए से देखता है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि योगी सरकार विकास, रोजगार और महंगाई जैसे असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए नाम बदलने की सियासत कर रही है. विपक्षी दलों का कहना है कि इससे समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है और सरकार जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय प्रतीकात्मक राजनीति पर फोकस कर रही है.
मीडिया और सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में कुशीनगर के फाजिलनगर का नाम बदलकर 'पावा नगरी' करने की शुरू की गई है. इसके साथ ही काशी में 50 मुस्लिम नाम वाले इलाकों का नया नाम पहले ही बदला जा चुका है. वहीं, अलीगढ़, संभल, फर्रुखाबाद, सुल्तानपुर और शाहजहांपुर समेत 12 बड़े शहरों के नाम बदलने का प्रस्ताव भी सरकार के कैबिनेट में विचाराधीन है.