UP Theft Incident in Burqa: अयोध्या के बाद अब मुजफ्फरनगर में बुर्का पहनकर चोरी की घटनाएं सामने आई हैं. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अयोध्या की तरह इस मामले में भी दक्षिणपंथी संगठनों ने बुर्का पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए समुदाय विशेष को टार्गेट करना शुरू कर दिया है, जबकि जबकि कई लोग इसे मजहबी आजादी बताकर इसका विरोध कर रहे हैं.
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Uttar Pradesh News: बुर्का, जिसे महिलाएं अपनी पहचान, मर्यादा और सम्मान से जोड़कर पहनती हैं, अब कुछ लोगों की हरकतों की वजह से विवादों में है. उत्तर प्रदेश में अयोध्या के बाद अब मुजफ्फरनगर से ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां बुर्का पहनकर चोरी करने की वारदातों ने स्थानीय व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इससे पहले बीते दिनों अयोध्या में एक महिला पिस्टल की नोंक पर लाखों की ज्वेलरी लूट कर फरार हो गई. इसके बाद समुदाय विशेष से जोड़कर दक्षिणपंथी बुर्के को बैन करने की मांग लगे, लेकिन पुलिस जांच आरोपी महिला पायल निकली, जिसका ताल्लुक बहुसंख्यक समुदाय से था.
बुर्के में लूट की घटनाओं से मची सनसनी
इसी तरह का हैरान करने वाला मामला मुजफ्फरनगर के नगर कोतवाली क्षेत्र के व्यस्त गोल मार्केट से सामने आई है, जहां शुक्रवार (10 अप्रैल) को दो अलग-अलग दुकानों पर चोरी की घटनाएं सामने आईं. दोनों घटनाएं सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गईं, जिसके बाद यह मामला तेजी से फैल गया. पहली घटना में एक बुर्का पहने महिला दुकान के बाहर रखे एक डेमो पिट्ठू बैग को उठाकर ले जाती दिखाई पड़ रही है. बताया जा रहा है कि उस बैग की कीमत करीब 1600 रुपये थी.
वहीं, दूसरी घटना में एक अन्य बुर्काधारी महिला पास की कॉस्मेटिक दुकान से फेस क्रीम चोरी करते हुए कैमरे में कैद हो गई. इन घटनाओं के दौरान कुछ और महिलाएं भी बुर्का पहने हुए उनके साथ मौजूद नजर आईं, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि यह किसी संगठित गिरोह का काम हो सकता है. दुकानदारों को चोरी की जानकारी उस समय हुई, जब शाम को उन्होंने अपने सामान की जांच की और एक बैग गायब मिला.
इसके बाद जब दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली गई, तो पूरी घटना सामने आ गई. फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि कैसे महिलाएं मौके का फायदा उठाकर सामान लेकर चली जाती हैं. सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर पोस्ट करते ही वायरल हो गई, इसके बाद अयोध्या में हुई लूट की घटना के बाद एक समुदाय विशेष की महिलाओं को निशाना बनाया जाने लगा.
दो अलग-अलग मामलों की लूट की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची. पुलिस फुटेज की गहनता से जांच कर आरोपियों की पहचान करने और उनकी तलाश में जुट गई है. स्थानीय व्यापारियों में इन घटनाओं को लेकर चिंता का माहौल है. उनका कहना है कि इस तरह की वारदातें बाजार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं. कई दक्षिणपंथी संगठन और दुकानदारों ने दबी जुबान में बुर्का पहनकर आने वाली महिलाओं की दुकान में एंट्री पर बैन लगाने की मांग की है.
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जब बुर्का पहनकर चोरी करने वाली निकलीं गैर-मुस्लिम
बता दें, देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आए कुछ मामलों ने यह दिखाया है कि अपराधी पहचान छिपाने के लिए किसी भी तरह का भेष अपना सकते हैं. इसका आरोप अक्सर मुसलमानों पर मढ़ दिया जाताहै. उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के रुदौली कस्बे में 2 अप्रैल 2026 को एक ज्वेलरी शॉप में 25 साल की पायल नाम की महिला ने बुर्का पहनकर दिनदहाड़े लूट की वारदात को अंजाम दिया. वह ग्राहक बनकर दुकान में दाखिल हुई और नकली पिस्तौल दिखाकर करीब 26 ग्राम सोने की चेन लेकर फरार हो गई. बाहर उसका साथी राहुल बाइक पर इंतजार कर रहा था. हालांकि पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर दोनों को गिरफ्तार कर लिया और लूटा गया सामान बरामद कर लिया. पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई, जो बाद में वायरल हो गई.
ऐसा ही एक मामला गाजीपुर रेलवे स्टेशन का है, जहां अक्टूबर 2022 में तीन महिलाओं ने बुर्का पहनकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था. इस घटना को 2025 में फिर से वायरल किया गया, लेकिन फैक्ट-चेक में इसकी सच्चाई सामने आई और तीनों महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में भी दक्षिणपंथी संगठनों ने आरोपी महिलाओं को मुस्लिम समुदाय से जोड़कर सोशल मीडिया पर पेश किया था, लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी के बताया कि उनके नाम मनीषा, पूल्लू और सीमा हैं. इन तीनों का ताल्लुक बहुसंख्यक समुदाय से था. इसके अलावा तमिलनाडु के चेन्नई क्षेत्र में भी एक महिला के जरिये कर्ज चुकाने के लिए बुर्का पहनकर चोरी की कोशिश का मामला सामने आया. जांच में वह भी बहुसंख्यक समुदाय से निकली.
बुर्का पर पाबंदी की मांग ने पकड़ा जोर
इन घटनाओं से साफ है कि बुर्का या कोई भी भेष अपराध का साधन बन सकता है, जिसका किसी धर्म से सीधा संबंध नहीं होता, बल्कि यह सिर्फ पहचान छिपाने का तरीका होता है. हालांकि, इसके बावजूद दक्षिणपंथी संगठन अक्सर इसको समुदाय विशेष से जोड़ कर पेश करते रहे हैं. दूसरी तरफ बुर्का पहनकर लूट की वारदात से आहत कई प्रदेश के ज्वेलर्स और दुकानदारों ने इस तरह का लिबास पहन कर आने वालों पर प्रतिबंध का ऐलान किया. इसको लेकर बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हो गया.
बीते जनवरी 2026 के दौरान ज्वेलरी दुकानों में एक नए नियम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया. कई राज्यों में सोना-चांदी के व्यापारियों ने फैसला लिया कि दुकान में आने वाले ग्राहकों को चेहरा दिखाना होगा. यानी बुर्का, नकाब, हिजाब, घूंघट, मास्क या हेलमेट पहनकर आने वालों को बिना पहचान के एंट्री नहीं दी जाएगी. इस फैसले को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई. एक तरफ व्यापारी इसे सुरक्षा का जरूरी कदम बता रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठाए.
सबसे बड़ा मामला बिहार में 7 से 8 जनवरी 2026 को सामने आया. पटना, मुजफ्फरपुर और बेतिया समेत कई शहरों में ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन (AIJGF) के बिहार चैप्टर ने यह नियम लागू किया. दुकानों के बाहर साफ नोटिस लगा दिए गए कि चेहरा ढककर आने वाले ग्राहकों को अंदर आने की इजाजत नहीं होगी. इस फैसले पर RJD, AIMIM और राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने आपत्ति जताई और इसे भेदभावपूर्ण बताया. वहीं व्यापारियों का कहना था कि यह कदम चोरी और लूट की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए उठाया गया है, किसी मजहब को निशाना बनाने के लिए नहीं है.
इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में झांसी, अमेठी और वाराणसी जैसे शहरों में इसी तरह के नोटिस लगाए गए. वाराणसी में 10 जनवरी को ज्वेलर्स एसोसिएशन की स्थानीय इकाई ने चेहरा ढककर आने वालों को जेवर बेचने पर रोक लगाने का फैसला लिया. कमोबेश इसी तरह की मांग झारखंड से भी सामने आई, जब करीब 14 जनवरी 2026 के आसपास पुलिस ने सर्कुलर जारी कर ज्वेलरी दुकानों में चेहरा ढककर एंट्री पर रोक लगाने की बात कही. बोकारो में लूट की कोशिश के बाद यह कदम उठाया गया, जिसका व्यापारियों ने समर्थन किया.
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