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Balrampur News Today: उत्तर प्रदेश में एक और मजार को अवैध बताकर शासन प्रशासन ने बुलडोजर से रौंद दिया. प्रदेश के बलरामपुर जिले में सोमवार (1 नवंबर) को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सालों पुराने एक मजार को अवैध बताकर बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. प्रशासन का दावा है कि यह मजार सरकारी जमीन पर अवैध ढंग से बनाई गई थी. यह मजार गंगा जमुनी तहजीब का केंद्र था, जहां पर हिंदू और मुस्लिम दोनों पूरे अकीदत के साथ अपनी मुराद लेकर आते थे।
दरअसल, यह पूरा मामला बलरामपुर जिले के थाना सादुल्लानगर का है. मिली जानकारी के मुताबिक, थाना सादुल्लानगर के परिसर में बनी मजार को प्रशासने अवैध बताया था. प्रशासन ने दावा किया कि इस मजार को सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनाया गया है. सोमवार को बड़ी संख्या पुलिस फोर्स की मौजूदगी ने प्रशासन ने मजार को बुलडोजर से ढहा दिया.
2013 से शुरू हुआ मजार को लेकर विवाद
कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग, पुलिस टीम और अधिकारी मौजूद रहे. मजार का मलबा हटाकर पास के सरकारी तालाब में दफन कर दिया गया. इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला लगभग 12 साल से विवादों में चल रहा था और जमीन पर कब्जे का आरोप लग रहा था. थाना सादुल्लानगर की गाटा संख्या 696, जिसका कुल रकबा 2.16 एकड़ है, यह जमीन सरकारी अभिलेखों में थाने की संपत्ति के रूप में दर्ज है.
आरोप है कि साल 2013 में पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी ने अपने भाई मारूफ अनवर हाशमी को मजार का प्रबंधक बनाकर इसी जमीन के लगभग 0.18 एकड़ हिस्से को फर्जी तरीके से मजार के नाम दर्ज करा लिया. दस्तावेज तैयार होने के बाद यहां 'मजार शरीफ बाबा सहीदे मिल्लत अब्दुल कुद्दूश शाह रहमतुल्लाह अलैह' के नाम से निर्माण भी करा दिया गया, जबकि जमीन पुलिस थाने की थी.
पुलिस की पैरवी के बाद कब्जा निरस्त
अवैध कब्जे का पता चलने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज कराया. दस्तावेजों की जांच और लगातार पैरवी के बाद उपजिलाधिकारी (एसडीएम) उतरौला ने 19 मार्च 2024 को आदेश जारी करते हुए फर्जी दस्तावेज निरस्त कर दिए और जमीन को दोबारा थाने की संपत्ति के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया. इसी मामले में पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी, मारूफ अनवर हाशमी समेत अन्य लोगों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120B और 2/3 गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा भी दर्ज किया गया. पुलिस जांच में इसे सरकारी जमीन हड़पने की सुनियोजित साजिश बताया गया.
वाद आयुक्त ने भी खारिज किया दावा
एसडीएम के आदेश को चुनौती देते हुए मजार प्रबंधन से जुड़े लोगों ने देवीपाटन मंडल के वाद आयुक्त के सामने अपील की थी. 28 नवंबर 2025 को सुनवाई के बाद वाद आयुक्त ने भी दावा खारिज कर दिया और पहले से लागू स्थगन या निगरानी आदेश हटाते हुए फाइल वापस भेज दी. इससे जमीन खाली कराने का रास्ता साफ हो गया. थानाध्यक्ष ने दोबारा अवैध निर्माण हटाने के लिए तहसीलदार उतरौला को अनुरोध किया. तहसीलदार ने 28 नवंबर 2025 को बेदखली और क्षतिपूर्ति का आदेश जारी करते हुए कब्जाधारियों को दो दिन का समय दिया. निर्धारित समय पूरा होने पर सोमवार 1 दिसंबर को प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और अवैध मजार को पूरी तरह हटाने की कार्रवाई की गई.