)
Shahjahanpur News Today: उत्तर प्रदेश में प्रशासन की एक और कार्रवाई ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे कथित भेदभाव को उजागर कर दिया. इसका ताजा उदाहरण शाहजहांपुर में देखने को मिला, जहां जिला प्रशासन ने सालों पुराने मुस्लिम आबादी को गिरा दिया है. बताया जा रहा है कि प्रशासन ने जिस जमीन को पहले आबादी बताई थी, अब उसे श्मशान घोषित कर दिया.
यह पूरा मामला शाहजहांपुर जिले की तहसील जलालाबाद के ग्राम पंचायत रोली बोरी का है. यहां जिला प्रशासन ने कथित तौर पर श्मशान की जमीन पर बने 40 से ज्यादा घरों को बुलडोजर से ढहा दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिला प्रशासन ने ही पहले इसी जमीन को सरकारी दस्तावेजों में आबादी की भूमि के रूप में दर्ज किया था और लोगों को इस पर पट्टे भी जारी किए थे.
एडीएम प्रशासन रजनीश कुमार मिश्रा ने बताया कि जलालाबाद तहसील के रोली बोरी गांव में करीब 15 बीघा जमीन श्मशान की है. इसी जमीन को खाली कराने के लिए जलालाबाद तहसील अदालत ने लगभग 43 मकानों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू की है. उन्होंने बताया कि कथित अतिक्रमण करने वालों को कई बार नोटिस दिया गया, लेकिन जब मकान मालिकों ने कब्जा नहीं हटाया तो मजबूरी में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में घरों को गिराने का काम शुरू किया गया.
इंकलाब में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस जमीन को खाली कराने की मांग स्थानीय हिंदूवादी संगठन के जरिये की जा रही थी. इसके बाद प्रशासन ने श्मशान की जमीन पर बने मकानों को चिन्हित कर लाल रंग लगाकर कार्रवाई की निशानदेही कर दी. वहीं, कल जिला प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस फोर्स के साथ पहुंचकर गांव में अवैध निर्माण हटा दिया.
एडीएम ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए सोमवार को 3 एसडीएम, 1 एसडीएम न्यायिक, 3 सीओ, कई थानों के प्रभारी, बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए गए थे. सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और एंबुलेंस को भी तैनात किया गया.
दूसरी ओर इस कार्रवाई से प्रभावित लोगों ने प्रशासन के कदम पर गंभीर सवाल उठाए हैं. जिला पंचायत सदस्य के पति तसव्वुर अली ने बताया कि रोली बोरी गांव में ठाकुर समाज के एक शख्स ने बहुत पहले श्मशान के लिए जमीन दान दी थी, लेकिन वहां कभी अंतिम संस्कार नहीं हुआ. इसके बाद 1990 में इस जमीन को आबादी की भूमि के रूप में दर्ज कर लिया गया. बाद में प्रशासन ने इसी जमीन पर लोगों को पट्टे आवंटित किए और एक सरकारी स्कूल भी बनवाया गया.
तसव्वुर अली ने कहा कि जब कुछ लोगों ने जलालाबाद एसडीएम की अदालत में केस दायर किया था, तब कब्जेदार वहां से और बाद में डिविजनल कमिश्नर की अदालत से भी केस जीत चुके थे. लेकिन साल 2024 में प्रशासन ने अपने ही पुराने आदेश को रद्द कर दिया और फिर से इस जमीन को श्मशान की भूमि घोषित कर दिया. इसके बाद कब्जेदारों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी कर दिए गए.