)
Varanasi News Today: उत्तर प्रदेश में तरक्की और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के नाम पर लगातार बुलडोजर एक्शन जारी है. बुलडोजर कार्रवाई को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में शुमार करती है. वहीं, इतवार (28 सितंबर) को वाराणसी में पद्मश्री ओलम्पियन मोहम्मद शाहिद के पैतृक मकान को प्रशासन ने बुलडोजर से ढहा दिया. इस कार्रवाई के दौरान मौके पर बड़ी संख्या पुलिस के जवान तैनात थे.
प्रशासन की तरफ से सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया के तहत शाहिद के तीन मंजिला मकान को गिरा दिया गया. यह मकान कचहरी गोलघर इलाके में स्थित था. कार्रवाई के दौरान मकान का गेट भी उखाड़ दिया गया. जानकारी के मुताबिक, कचहरी से संदहा तक 26 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जा रही है. इसी परियोजना के तहत हाकी के दिग्गज खिलाड़ियों में शुमार पद्मश्री पुरस्कार विजेता मोहम्मद शाहिद का मकान भी अधिग्रहण की जद में आ गया.
प्रशासन ने मकान का करीब 10 फीट हिस्सा यानी लगभग 43 वर्ग मीटर जमीन अधिग्रहित की थी. लोक निर्माण विभाग की ओर से कचहरी से पुलिस लाइन चौराहे तक फोरलेन सड़क का काम किया जा रहा है. इस काम के लिए कुल 69 मकान तोड़े जाने हैं. जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त कार्रवाई में पिछले सप्ताह ही 35 मकानों को जमींदोज किया जा चुका है.
इधर, मकान तोड़े जाने पर मोहम्मद शाहिद के भाई ने नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि प्रशासन से कुछ वक्त की मोहलत मांगी गई थी, लेकिन अधिकारियों ने एक न सुनी और सीधे बुलडोजर चलवा दिया. तीन मंजिला मकान को गिरा दिया और गेट को उखाड़ दिया. जिससे परिवार को गहरी चोट पहुंची है.
हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर प्रभावित लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है. कई व्यापारियों और मकान मालिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला है. उनका कहना है कि प्रशासन ने सिर्फ निर्माण लागत का भुगतान किया, जबकि जमीन की वास्तविक कीमत नहीं दी गई. स्थानीय लोगों ने इसे नाइंसाफी करार देते हुए विरोध जताया था. जबकि शाहिद की बीवी और उनके परिवार के लोगों ने सरकार से मुआवजा और स्मारक बनाने की मांग की थी. हालांकि, बाद में परिवार ने मुआवजा ने स्वीकार तो कर लिया लेकिन स्मारक बनाने की मांग रखी.
गौरतलब है कि मोहम्मद शाहिद भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ियों में गिने जाते हैं. उन्होंने 1970 और 1980 के दशक में अपनी बेहतरीन स्पीड और ड्रिब्लिंग से भारत को कई जीत दिलाई थी. उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था.हॉकी के 'जादूगर' के नाम से फेमस शाहिद ने 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. साल 2016 में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया.