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Uttar Pradesh News Today: उत्तर प्रदेश में दक्षिणपंथी संगठनों के जरिये बोया गया सांप्रदायिक जहर अब त्योहारों पर भी देखने को मिल रहा है. सावन में कांवड़ यात्रा में मुस्लिम दुकानदारों के विरोध के बाद होली, रक्षाबंधन और गरबा में भी उनका विरोध किया गया. आलम यह है कि कई जगहों पर इसका असर भी देखने को मिल रहा है, जिसकी वजह से मुसलमानों को सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार के साथ हिंसा का भी सामना करना पड़ हा है.
करवा चौथ के पवित्र त्योहार से पहले हिंदूवादी संगठनों ने एक बार फिर मुसलमानों को बहिष्कार करने की मांग की है. इसकी वजह से मेरठ में करवा चौथ के त्योहार पर मुसलमानों से कोई भी काम करवाने से औरतों ने इंकार कर दिया है. लगातार मुसलमानों को खिलाफ फैलाए जा रहे प्रोपैगेंडा का ही असर है कि औरतों ने आरोप लगाया कि "मेंहदी के लिए हाथ पकड़ने वाला मुस्लिम नौजवान लव जिहाद भी फैलाएगा."
बहुसंख्यक समुदाय की लड़कियों को लव जिहाद से बचाने का दावा करते हुए 'सेवा भारती' नाम के हिंदूवादी संगठन मोर्चा खोल दिया है. मुस्लिम महिला और पुरूष कारीगरों को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने के मकसद से 'सेवा भारती' ने करवा चौथ के त्योहार से ठीक पहले मेहंदी कैंप लगा दिया है. मेरठ में जगह-जगह मेहंदी कैंप लगाए गये हैं. जिसमें बहुसंख्यक समुदाय की लड़कियों को मेंहदी लगाई जा रही है.
एक समुदाय के खिलाफ फैलाई गई नफरत की वजह से आर्थिक रूप से कमजोर मेंहदी डिजाइन करने वाले कारीगरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या पैदा हो गई है. 'सेवा भारती' कैंप में मेहंदी लगवाने के लिए लंबी कतार भी लगी है. इतना ही नहीं कट्टरपंथी संगठन की तरफ से मांग की गई है कि हिंदुओं के त्योहार पर मुसलमान कमाई न कर पाएं, इसलिए उन पर बैन लगा दिया जाए.
हैरान करने वाली बात यह है कि हिंदूवादी संगठनों ने दावा किया कि मुसलमानों के त्योहार पर हिंदुओं की एंट्री ना के बराबर है, लेकिन हिंदुओं के त्योहार में मुसलमानों को कमाने का मौका मिल जाता है, इसलिए मुसलमानों कारीगरों और दुकानदारों पर बैन लगना चाहिए. 'सेवा भारती' के पदाधिकारियों ने विवादित मांग करते हुए कहा कि "हिंदू धर्म को बचाने के लिए ऐसा अनिवार्य होना चाहिए.
इसी तरह की नफरत फैलाने वाली विवादित मांग मथुरा में देखने को मिली. हिंदू संगठन से ताल्लुक रखने औरतों ने मुस्लिम कारीगरों से मेंहदी न लगाने की अपील की है. सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली इस मांग पर शासन प्रशासन की खामोशी कई तरह के सवाल पैदा कर रही है. मुस्लिमों के साथ बहुसंख्यक समुदाय के शांति पसंद लोगों ने प्रशासन की चुप्पी पर हैरानी जताई है.
बैन की मांग करने वाले का कहना है कि हिंदू औरतें अपने त्योहारों पर मेहंदी सिर्फ हिंदुओं से ही लगवाएं ताकि इस कला और कारोबार से जुड़ी हिंदू बहनों को आर्थिक मदद मिल सके. यह अपील खास तौर पर करवा चौथ और अन्य तीज-त्योहारों को ध्यान में रखकर की गई है, जब मेहंदी लगाने की परंपरा सबसे ज्यादा होती है. अपील करने वाली महिलाओं का कहना है कि अगर हिंदू महिलाएं सिर्फ हिंदू मेहंदी कलाकारों को मौका देंगी, तो इससे उन्हें रोजगार मिलेगा और वे आत्मनिर्भर बनेंगी.
महिलाओं के समूह का यह भी कहना है कि कई जगहों पर मुस्लिम कारीगरों के पास मेहंदी लगाने का ठेका होता है, जिसकी वजह से हिंदू महिलाएं इस काम में पीछे रह जाती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने शहर के बाजारों और ब्यूटी पार्लरों के बाहर पर्चे बांटे हैं और सोशल मीडिया पर भी अपनी बात रखी है.
इस अपील को लेकर शहर में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. कुछ लोग इसे स्थानीय रोजगार बढ़ाने की अच्छी पहल बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास मान रहे हैं. हालांकि, अपील करने वाली महिलाओं ने साफ किया है कि उनका मकसद किसी धर्म या समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं है बल्कि सिर्फ हिंदू कारीगरों के काम को बढ़ावा देना है. महिलाओं ने शहर की सभी हिंदू महिलाओं से अपील की है कि वे इस पहल का समर्थन करें और आने वाले त्योहारों पर मेहंदी लगाने के लिए हिंदू कारीगरों को प्राथमिकता दें.