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UP News: मेरठ में आयोजित राम कथा के दौरान संत स्वामी रामभद्राचार्य के जरिए इस्लाम धर्म पर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज़ जताते हुए कहा कि धार्मिक संतों को इस तरह की राजनीतिक टिप्पणियों से बचना चाहिए.
मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने साफ किया कि इस्लाम धर्म में महिलाओं को पूरा सम्मान दिया जाता है. उनका कहना है कि स्वामी जी के जरिए दिया गया बयान पूरी तरह गलत है, क्योंकि महिलाओं की इज्जत सबसे अधिक इस्लाम में ही की जाती है. मदरसों में शिक्षा को लेकर किए गए बयान पर भी उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई,
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी ने कहा,"मुस्लिम समाज में महिलाओं को हमेशा इज्जत दी जाती है. यहां तक कि महिलाओं के लिए इस्लामिक किताबों में भी साफ उल्लेख मिलता है. कथा वाचकों के जरिए मुस्लिम महिलाओं को लेकर अनर्गल बयानबाज़ी करना बेहद गलत है.
उन्होंने आगे कहा कि इस्लाम में महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया गया है. उदाहरण देते हुए मौलाना ने कहा कि जब जमीन-जायदाद का बंटवारा होता है तो भाइयों के साथ बहनों को भी हिस्सा मिलता है. इसके अलावा इस्लाम में मां के पैरों में जन्नत बताई गई है.
मौलाना शहाबुद्दीन ने स्वामी रमभद्राचार्य को नसीहत देते हुए कहा कि इस्लाम में महिलाओं की मसले मसाइल के लिए मौलाना और धर्मगुरु मौजूद हैं, इसलिए उन्हें इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि संतों को चाहिए कि वे दूसरे धर्म पर टिप्पणी करने के बजाय अपने समाज की कुरीतियों को दूर करने पर ध्यान दें.
रामभद्राचार्य ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं को यूज़ एंड थ्रो जैसा बर्ताव किया जाता है. उन्होंने कहा कि इस्लाम में महिलाओं से 25 बच्चे पैदा कराए जाते हैं, इसके बाद बुढ़ापे में उन्हें तलाक देकर छोड़ दिया जाता है. रामभद्राचार्य ने मदरसों और कॉन्वेंट का विरोध करते हुए कहा कि बच्चों की परवरिश सरस्वती शिशु मन्दिर के स्कूलों में होनी चाहिए.