2021 Muslim cleric abused in Noida: सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में नॉएडा में एक मुस्लिम मौलवी को कैब में लिफ्ट देने के बाद उसकी टोपी उछालकर और दाढ़ी खींचकर मारपीट के मामले में UP सरकार को इस बात के लिए फटकार लगाई है कि पुलिस ने इस मामले में हेट क्राइम की धाराएं न जोड़कर केस को कमजोर किया और आरोपियों को बचाने की कोशिश की.
Trending Photos
)
नई दिल्ली: 2021 में दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नॉएडा में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग की दाढ़ी खींचकर उसके साथ मारपीट करने के मामले में मुलजिमों के खिलाफ सामान्य धाराएं लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को इस केस में धर्म के आधार पर किये जाने वाले हेट क्राइम की धाराएं जोड़ने के लिए दो हफ़्ते का वक़्त दिया है.
जून 2021 में मौलवी काज़ीम अहमद शेरवानी की शिकायत के मुताबिक, एक चलती वैन में कुछ लोगों ने शुरू में उन्हें लिफ्ट देने की पेशकश की, जब वह नोएडा से अलीगढ़ जा रहे थे, और फिर वैन में सवार लोगों ने उनकी दाढ़ी खींचकर और उनकी टोपी हटाकर उनके साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया.
इस मामले में नाराजगी जताते हुए, जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि अपने पहले के आदेश में सवाल किए जाने के बावजूद कि अधिकारियों ने अभी तक इन नियमों को लागू क्यों नहीं किया है? कोर्ट ने कहा कि वह इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (I/O) को कंप्लायंस फेलियर के बारे में बताने के लिए बुलाना चाहते हैं.
हालांकि, उत्तर प्रदेश की जानिब से पेश हुए वकील, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) के.एम. नटराज के रिक्वेस्ट पर, जिसमें कोर्ट के पहले के ऑर्डर का पूरी तरह से कंप्लायंस पक्का करने के लिए वक़्त मांगा गया था, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को दो हफ्ते का टाइम दिया है. इस मामले में कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 मई को लिस्ट की है. फरवरी में मामले की पिछली सुनवाई में, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह मामले में हेट क्राइम की धाराएं जोड़ें, जिसके जवाब में ASG नटराज ने कहा कि वही लागू होगा.
पुलिस अपराधियों को बचा रही थी
गौरतलब है कि इस केस के पीड़ित मौलवी शेरवानी ने नवंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उन्होंने इलज़ाम लगाया था कि नोएडा पुलिस के अफसरों ने शुरू में उनकी शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया था. उन्होंने हेट क्राइम के पीड़ितों के लिए मुआवजे का फ्रेमवर्क और गलती करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की थी.
जनवरी 2023 में, उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक FIR दर्ज की, जिसमें सिर्फ क्रिमिनल इंटिमिडेशन और चोट पहुंचाने तक लिमिटेड चार्ज लगाए गए, यह दावा करते हुए कि आरोपियों का इरादा रॉबरी करने का था. उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया था कि शिकायत दर्ज न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ डिसिप्लिनरी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. कोर्ट ने पहले भी सवाल किया था कि जब कथित अपराध धार्मिक रंग का लग रहा है, तो पुलिस धर्म पर आधारित अपराधों से जुड़े नियम क्यों नहीं लगा रही है?
इसे भी पढ़ें: Badayun: सरकारी अस्पताल में नमाज़ पढ़ने पर बवाल; वायरल वीडियो पर लोग उठा रहे सवाल?
इसे भी पढ़ें: हिन्दू छात्रों से ईद की नमाज़ पढ़वाने के आरोपी प्रोफेसर को HC से नहीं मिली राहत, जारी रहेगा ट्रायल