Muslim Discrimination in UP: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में पापड़ मंदिर की सेवा करने वाले मुस्लिम देखभाल करने वाले अली मोहम्मद को नमाज अदा करने पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. वह 35 साल से मंदिर में सेवा कर रहे थे. हालांकि, अब मंदिर समिति ने उनके सेवा को भुलाकर नौकरी से भी निकाल दिया. मंदिर के पुजारी परमानंद दास भारी विरोध के बावजूद मोहम्मद के साथ खड़े हैं.
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Badaun News Today: हिंदुस्तान सैकड़ों साल से गंगा जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है. हालांकि, हालिया कुछ सालों में दक्षिणपंथी विचारधारा वाली सरकारों के शासन में आने के बाद मुसलमानों के खिलाफ नफरत बढ़ गई है. जिस हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की पूरी दुनिया में मिसाल दी जाती थी, उसको अब जैसे किसी की नजर लग गई है. इसी तरह का मामला उत्तर प्रदेश के बदायूं से आया है.
दरअसल, उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में पापड़ मंदिर में एक मुस्लिम शख्स के कदमों की गूंज तीन दशक से सुनाई देती थी. मंदिर में आने वाले भक्त उनकी बहुत इज्जत करते थे. लेकिन बीते दिनों ने पुलिस ने एक वायरल वीडियो के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.
बदायूं जिले का पापड़ मंदिर काफी मशहूर है. यहां हर रोज बड़ी संख्या में भक्त पूजा अर्चना के लिए पहुंचते थे. इस मंदिर में बीते 30 से 35 सालों से 'मोहम्मद भाई' नाम के मुस्लिम शख्स सेवा करते थे. ऐसा नहीं है कि 'मोहम्मद भाई' ने अपना धर्म बदल दिया था और मंदिर में भक्त बन गए थे बल्कि वह यहां महज मंदिर की देखभाल करते थे.
मुस्लिम होने के बावजूद मोहम्मद भाई पूरी इज्जत और अकीदत के साथ मंदिर की सफाई करते, मूर्तियों को सजाते, दीपक जलाते और आने वाले भक्तों का हाथ जोड़कर स्वागत करते थे. मंदिर उनके लिए सिर्फ काम की जगह नहीं बल्कि घर था, जहां वह बिना किसी धन-दौलत की लालच किए लंबे समय से सेवा कर रहे थे.
पिछले महीने मोहम्मद भाई पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और अचानक उनकी बदल गई. उन्हें मंदिर परिसर में नमाज अदा करने पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पुलिस एक्शन परतो वह खुद भी नहीं समझ पाए कि उन्होंने ऐसा कौन सा जुर्म कर दिया है, जिसकी वजह से उन्हें जेल भेजा जा रहा है.
बाद में मंदिर समिति ने हिंदूवादी संगठनों की दबाव में मोहम्मद भाई की मेहनत, अकीदे और प्रेमभाव को भुलाकर नौकरी से हटा दिया. इस घटना ने हिंदू- मुस्लिम समेत सभी समुदाय के लोगों को हैरान कर दिया, लेकिन मंदिर के पुजारी परमानंद दास उनके साथ खड़े नजर आए. मंदिर के पुजारी परमानंद दास ने मोहम्मद भाई को जमानत दिलाने में मदद करने की पेशकश की है.
मकतूब मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 60 साल के मोहम्मद भाई जिले के दाहरपुर कला गांव के रहने वाले हैं. वह ब्रह्मदेव महाराज मंदिर में बीते 35 साल से ज्यादा समय से सेवा कर रहे थे. मोहम्मद भाई के परिवार से दूर यह मंदिर रोज़ी-रोटी और आश्रय दोनों था. स्थानीय लोग उन्हें 'मोहम्मद भाई' के नाम से बुलाते हैं.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मोहम्मद भाई की रोजमर्रा की जिंदगी लगभग एक जैसी होती थी. वह ब्रह्मदेव महाराज मंदिर में सुबह उठकर सफाई करते थे. इसके बाद आवारा गाय और कुत्तों को खाना देते, आरती में भक्तों की मदद करते और फिर मंदिर के दूसरे कामों में लग जाते थे. पुजारी दास ने बताया कि "मोहम्मद भाई मंदिर को अपना आश्रय मानते थे. यहां उनकी सभी समुदाय के लोग इज्जत देते थे, भले ही वह अकेले थे."
ब्रह्मदेव महाराज मंदिर के पुजारी परमानंद दास के मुताबिक, बगैर किसी को परेशान किए मंदिर परिसर में पेड़ के नीचे मोहम्मद अपनी नमाज अदा करते थे. इसकी जानकारी सबको थी और सालों से इस पर कभी भी किसी को कोई आपत्ति नहीं थी. हालांकि, मंदिर परिसर में खुदा की इबादत करना जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर भारी पड़ गया.
वायरल वीडियो बनी मुसीबत
दो महीने पहले किसी ने चुपके से मोहम्मद भाई की नमाज अदा करते हुए वीडियो बना ली. जिसमें वह पेड़ के नीचे नमाज अदा कर रहे थे. 28 जून को यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. कुछ लोगों ने इसे मंदिर अपवित्र करने का आरोप लगाकर आपत्ति जताई. फिर क्या था पुलिस ने बगैर जांच किए उन्हें गिरफ्तार कर लिया और 14 दिन रिमांड पर रखा.
इस मामले में मोहम्मद भाई के खिलाफ बदायूं पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 298 के तहत 'धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को अपवित्र करना' का मामला दर्ज किया है. इस संबंध में डेटागंज पुलिस स्टेशन के सर्किल ऑफिसर ने बताया, "शिकायत सिर्फ वीडियो के आधार पर की गई थी. जिसके बाद यह कार्रवाई की गई."
मंदिर के पुजारी परमानंद दास ने मोहम्मद भाई को जमानत दिलाने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन मोहम्मद के भाई ने कड़ी मशक्कत के बाद उनकी जमानत करवाई. पुजारी ने बताया, "वह सुबह से शाम तक वह यहां रहते थे. उन्होंने मंदिर को अपना माना। किसी ने उनके धर्म पर सवाल नहीं उठाया, लेकिन एक नमाज ने सब बदल दिया और इस बात के लिए उन्हें जेल ठूंस दिया गया.
पुजारी दास ने मोहम्मद भाई की सेवा को निस्वार्थ बताया और कहा कि नमाज अदा करना उनका निजी मामला था. उन्होंने यह भी कहा कि "चुपके से वीडियो बनाना गलत था. मंदिर पूजा स्थल है. जिसने वीडियो बनाया, उसने साम्प्रदायिक सद्भाव भंग करने की कोशिश की." फिलहाल मंदिर समिति ने मोहम्मद को नौकरी से हटा दिया है, इसके बावजूद वह हर मंगलवार को मंदिरमें एक भक्त के रुप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं. दास ने बताया कि उनको यहां आने से कोई नहीं रोकता है और किसी को कोई आपत्ति भी नहीं है.
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