Maharashtra News: महाराष्ट्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां उर्दू स्कूलों पर आरोप लगा है कि उन्होंने जानबूझकर वंदेमातरम गाने का प्रोग्राम नहीं किया. पूरी खबर पढ़ने के लिए स्क्रॉल करें.
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Maharashtra News: महाराष्ट्र के मालेगांव में नगर निगम के लगभग 80 उर्दू स्कूलों के जरिए वंदे मातरम गीत का गायन नहीं करने का मामला सामने आया है. राज्य सरकार के आदेश के तहत 31 अक्टूबर से 7 नवंबर तक पूरे राज्य के स्कूलों में 'वंदे मातरम' गाने का कार्यक्रम आयोजित किया जाना था, लेकिन मालेगांव के इन स्कूलों ने इससे बचना का एक तोड़ निकाल लिया.
इन स्कूलों ने वंदे मातरब गाने वाले दिनों के दौरान दिवाली की छुट्टियों का ऐलान कर दिया, जिसके चलते यह प्रोग्राम नहीं हो सका. जानकारी के अनुसार, सरकारी स्तर पर दिवाली की छुट्टियां 17 अक्टूबर से 1 नवंबर तक (14 दिन) निर्धारित थीं. लेकिन नगर निगम के उर्दू स्कूलों ने 18 अक्टूबर से 6 नवंबर तक (18 दिन) छुट्टियां रखीं. इस कारण 'वंदे मातरम' कार्यक्रम रद्द हो गया और सरकारी आदेश का पालन नहीं किया गया.
इस मामले पर राज्य के मंत्री दादा भुसे ने कहा कि अगर किसी ने जानबूझकर ऐसा किया है, तो इसकी जांच कराई जाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि मालेगांव में उनकी मौजूदगी के बावजूद नगर निगम के उर्दू स्कूलों ने 'वंदे मातरम' का गायन नहीं किया.
वहीं, भाजपा नेता नितेश राणे ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अब सोचने का समय आ गया है कि इन लोगों को हिंदू राष्ट्र में कितना रखा जाए. अगर केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं का शत-प्रतिशत उपयोग किया जा रहा है, तो मोदी को कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन अगर इस देश में रहते हुए आपको डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान का सम्मान करने की ज़रूरत नहीं लगती और आप शरिया कानून लाना चाहते हैं, तो फिर हम इन लोगों को देश और राज्य में क्यों रखें.
राज्य सरकार ने अब इस पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है और शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि जांच कर यह साफ किया जाए कि क्या स्कूलों ने जानबूझकर सरकारी आदेश की अवहेलना की थी?