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USTM चांसलर महबूब उल हक को गुवाहाटी हाई कोर्ट से मिली राहत, इस केस में मिली जमानत

Guwahati High Court on USTM Chancellor: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेघालय के चांसलर महबूब उल हक बीते माह पुलिस ने गुहावटी से कथित धोखाधड़ी करने के मामले में गिरफ्तार कर लिया था. हालांकि, अब गुहावटी हाई कोर्ट से महबूब उल हक बड़ी राहत मिली है. जानें क्या है पूरा मामला

 

USTM चांसलर महबूब उल हक- फाइल फोटो
USTM चांसलर महबूब उल हक- फाइल फोटो

Meghalaya News Today: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने सोमवार (24 मार्च) को वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ और यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय (USTM) के चांसलर महबूब उल हक को अंतरिम जमानत दे दी. बीजेपी गठबंधन वाली सरकार के जरिये उन्हें 'ढकिया जोली' मामले में गिरफ्तार किया था. महबूब उल हक की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह देखा गया है कि याचिकाकर्ता ने जमानत देने के लिए मजबूत आधार प्रस्तर किये हैं.

हालांकि, न्याय के हित में अदालत ने आखिरी फैसला लेने से पहले केस डायरी की समीक्षा करना जरुरी समझा. जस्टिस मिताली ठाकुरिया ने याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत देते हुए जांच में पूरी तरह से सहयोग करने की शर्तें रखी. साथ ही कोर्ट ने कहा कि जरुरत पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा.

50 हजार के मुचलके पर मिली जमानत

गुहावटी हाई कोर्ट की तरफ से कहा गया कि केस से जुड़े संबंधित व्यक्ति को किसी भी प्रकार के प्रलोभन देना या धमकी देने से सख्ती से मना किया है. कोर्ट ने कहा कि USTM के चांसलर महबूब उल हक को जमानत 50 हजार रुपये की जमा राशि पर ही दी जाएगी.

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (USTM) मेघालय के चांसलर महबूब उल हक को बीते माह फरवरी में गुहावटी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया था. पुलिस के मुताबिक, महबूब उल हक पर आरोप है कि वह छात्रों को मेडिकल, इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम और सीबीएसई एग्जाम में ज्यादा से ज्यादा अंक दिलाने का झूठा वादा करते थे. इतना ही नहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी महबूब उल हक पर गंभीर आरोप लगाए थे. 
 
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया था कि USTM चांसलर महबूब उल हक ने छात्रों को स्पेशल स्कूलों में एग्जाम सेंटर बदलने का आश्वासन दिया था. सरमा के अनुसार, 200 से अधिक छात्रों को ग्वालपाड़ा, नागांव और कामरूप जिलों से श्रीभूमि जिले के पथकरंडी एग्जाम सेंटर पर भेजा गया था, लेकिन जब छात्रों को मदद नहीं मिली तो उन्होंने विरोध किया और मामला उजागर हो गया. हालांकि, अब लगभग एक महीने बाद महबूब उल हक को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. 

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