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Uttarakhand Anti Conversion Bill News: उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून को और सख्त बनाने के उद्देश्य से लाए गए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2025 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने राज्य सरकार को वापस भेज दिया है. यह कदम बिल के मसौदे में पाई गई कुछ गलतियों के कारण उठाया गया है.
उत्तराखंड लोकभवन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने बिल को एक मैसेज के साथ लौटाते हुए भाषा संबंधी खामियों की ओर सरकार का ध्यान दिलाया है. यह बिल गैरसैंण में हुई विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पारित किया गया था और इसके बाद राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा गया था.
यह संशोधन विधेयक प्रदेश में वर्ष 2018 से लागू धर्म स्वतंत्रता अधिनियम में दूसरी बार बदलाव के लिए लाया गया था, इससे पहले इस कानून में पहला संशोधन वर्ष 2022 में किया गया था, जब पुष्कर सिंह धामी ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.
उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2025 में जबरन धर्मांतरण के मामलों में सजा को और कड़ा करने का प्रावधान किया गया है. बिल के मुताबिक, ऐसे अपराधों में अधिकतम आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने की व्यवस्था प्रस्तावित है. मौजूदा कानून के तहत जबरन धर्मांतरण के लिए अधिकतम 10 साल की सजा और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
अमेंडमेंट बिल में सजा की कैटेगरी भी निर्धारित की गई हैं. सामान्य मामलों में तीन से 10 साल की कैद का प्रावधान है, वहीं सेंसिटिव मामलों में पांच से 14 वर्ष की सजा का प्रावधान है. जबकि गंभीर मामलों में 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है. बिल में धोखाधड़ी, लालच या दबाव के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए पहले से अधिक कठोर प्रावधान शामिल किए गए हैं.
इसके अलावा अमेंडमेंट बिल में डिजिटल माध्यमों के उपयोग पर भी सख्ती की गई है. सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए धर्मांतरण के प्रचार या उकसावे को दंडनीय अपराध बनाए जाने का प्रावधान किया गया है.