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Varanasi News Today: उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के मजहबी अधिकारों के कथित हनन का मामला फिर से तूल पकड़ने लगा है. बीते कुछ माह में प्रदेश के कई जिलों में योगी सरकार ने कथित अवैध मस्जिद, मदरसे, ऐतिहासिक दरगाह और ईदगाहों पर बुलडोजर चला दिया या फिर सील कर दिया है. वहीं, वाराणसी में 6 मस्जिदें सरकार के निशाने पर हैं.
दरअसल, वाराणसी के दालमंडी इलाके में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के विस्तार को लेकर और डिमोलिशन को लेकर विवाद शुरू हो गया है. इस बीच अब नगर निगम ने इलाके के 6 मस्जिदों समेत कुल 151 भवन मालिकों और दुकानदारों को नोटिस जारी किया है. इन सभी पर भारी-भरकम टैक्स बकाया बताया जा रहा है.
मिली जानकारी के मुताबिक, इन 151 भवनों पर सीवेज और पानी टैक्स सहित करीब 1.78 करोड़ रुपये का बकाया है. नगर निगम ने साफ कर दिया है कि अगर नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर बकाया टैक्स जमा नहीं किया गया, तो कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी. नगर निगम के इस नोटिस से पूरे दालमंडी इलाके में हड़कंप और अनिश्चितता का माहौल है.
यहां के कई व्यापारी और स्थानीय निवासी पहले से ही सड़क चौड़ीकरण और डिमोलिशन की कार्रवाई से परेशान हैं. अब टैक्स नोटिस आने से उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं. नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सभी नोटिस तय प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं. इनमें वे भवन शामिल हैं जिन्होंने सालों से पानी और सीवेज का टैक्स जमा नहीं किया. निगम का दावा है कि पहले भी कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया.
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि "हमने दालमंडी क्षेत्र में टैक्स बकायेदारों को नोटिस भेजे हैं. नोटिस जारी होने की तारीख से 15 दिन का समय दिया गया है." उन्होंने आगे कहा, "इस अवधि में टैक्स जमा नहीं किया गया तो कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी."
जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई किसी धार्मिक स्थल या व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं है बल्कि सभी बकायेदारों पर समान रूप से की जा रही है. संदीप श्रीवास्तव के मुताबिक, नगर निगम का लक्ष्य टैक्स वसूली में पारदर्शिता और समानता बनाए रखना है. इस नोटिस के बाद अगर कोई बकायेदार टैक्स नहीं जमा करता है तो नगर निगम कुर्की के आदेश जारी कर सकता है.
दालमंडी इलाके में इस कदम को लेकर स्थानीय लोगों की मिली जुली प्रतिक्रिया मिल रही है, कुछ लोग इसे नगर निगम की सख्ती और व्यवस्था सुधार की दिशा में कदम बता रहे हैं. वहीं कई स्थानीय लोग और व्यापारी इसे प्रशासन की मनमानी करार दे रहे हैं. उनका कहना है कि पहले से चल रहे डिमोलिशन और सड़क चौड़ीकरण के बीच अचानक टैक्स नोटिस भेजना जनता पर दोहरा बोझ डालने जैसा है.