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Uttar Pradesh News: देश में तालीम और बराबरी के अधिकार की बातें भले ही बड़े मंचों से की जाती हों, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है. बीते कुछ सालों में अल्पसंख्यकों को भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश के वाराणसी से भी इसी तरह का एक मामला सामने आया है, जहां एक मुस्लिम लड़की को महज अपने मजहब की वजह से जॉब इंटरव्यू में भेदभाव का सामना करना पड़ा.
वाराणसी की रहने वाली समरीन बानो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो शेयर कर अपना दर्द बयान किया. उन्होंने कहा कि आज के दौर में एक मुस्लिम टीचर को तरक्की करना मुश्किल हो गया है. उन्होंने वीडियो में बताया कि कई जगहों पर उन्हें सिर्फ मुस्लिम होने की वजह से नौकरी नहीं मिली.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मजहब की वजह से भेदभाव झेलने की दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इसके बाद सोशल मीडिया पर मुसलमानों की सुरक्षा और समाज में उनके प्रति बढ़ती नफरत को लेकर बहस छिड़ गई. एक तरफ समरीन को लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ दक्षिणपंथी संगठन उनके साथ हो रहे भेदभाव का समर्थन करते हुए नजर आ रहे हैं.
समरीन बानो ने कहा कि जहां भी वह पढ़ाने डेमो देने या इंटरव्यू के लिए जाती हैं, वहां उन्हें यह कहकर मना कर दिया जाता है कि वह अपने बच्चों को मुस्लिम टीचर से नहीं पढ़ाना चाहते. उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि समाज में इतनी नफरत फैल चुकी है कि छोटे बच्चों के मन में भी मुस्लिम टीचरों को लेकर दहशत और नफरत का जहर भर दिया गया है.
समरीन बानो ने कहा कि ट्यूशन के लिए पहले लोग बुलाते हैं, लेकिन मुस्लिम टीचर होने पर मना दिया जाता है. साथ ही यह भी बोलते हैं कि हम अपने बच्चों को आपसे नही पढ़ाएंगे. उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि इतनी नफरत लोगों में आती है, कहां से है. समरीन आगे कहती हैं कि स्कूल में भी बच्चों के मन में ऐसी नफरत भर दी जाती है कि वह मुस्लिम टीचर से दूरी बनाकर रखते हैं.
वीडियो में समरीन कहती हैं कि जब धीरे-धीरे बच्चों के मन में बोया गया जहर कम होता, और वह मुस्लिम टीचर को समझने लगते हैं. तब वह मुस्लिम टीचर से बातचीत करना शुरू करते हैं. उन्होंने बताया कि मुस्लिम टीचर्स को लेकर पहले से उनके मन में बैठाया गये भ्रम और नफरत की वजह से उन्हें पढ़ाना लिखाना मुश्किल हो जाता है. समरीन के मुताबिक, वह स्कूल में मजहब से जुड़ी हुई बातें क्यों करेंगी? वह यहां पर पढ़ाने आई हैं. मेरा काम है बच्चों को सभी मजहबों का सम्मान करना सिखाना. उन्होंने कहा कि हम किसी भी बच्चे से स्कूल में यह नहीं कहते हैं कि तुम अपना मजहब बदल लो.
समरीन के मुताबिक, मुस्लिम टीचर्स सभी मजहबों का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि मह लोग स्कूल में जाचे हैं, बच्चों को पढ़ाते हैं और सबको एक समान नजरों से देखते हैं. वह कहती हैं कि सभी स्कूलों के मॉर्निंग प्रेयर में सरस्वती वंदना पढ़ी जाती है, लेकिन हमें इसे कोई परेशानी नहीं है. उन्होंने कहा कि क्या किसी स्कूल में मुसलमानों से जुड़ी प्रेयर या दुआ मांगी जाती है? नहीं, बल्कि हाथ जोड़कर प्रेयर करवाई जाती है. और मुस्लिम टीचर बच्चों को स्कूल में यह सब करवाते हैं.
इस वीडियो के करीब चौदह दिन बाद शनिवार (9 मई) को समरीन बानो ने एक और वीडियो शेयर किया. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि वाराणसी के लाठो इलाके में स्थित बुद्धा पब्लिक स्कूल ने उन्हें हिजाब हटाकर पढ़ाने या नौकरी छोड़ने के लिए कहा.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित, समरीन का कहना है कि इंटरव्यूह के दौरान स्कूल की ओर से हिजाब को लेकर कोई शर्त नहीं रखी गई थी, लेकिन जब वह नौकरी के पहले दिन स्कूल पहुंचीं, तो प्रिंसिपल ने उनके हिजाब पर आपत्ति जताई.
समरीन ने आरोप लगाया कि स्कूल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 के तहत मिले मजहबी आजादी के अधिकार का उल्लंघन किया है. समरीन ने कहा कि यह मुसलमानों के खिलाफ एक तरह का प्रचार है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्कूल की डॉयरेक्टर खुद सुबह पूजा करती हैं, तो फिर उनको हिजाब से परेशानी क्यों है?
समरीन ने एक छोटा वीडियो भी शेयर किया, जिसमें स्कूल मैनेजमेंट से जुड़ा एक शख्स उन्हें यह कहते हुए दिखाई दे रहा है कि अगर स्कूल का नियम उन्हें सही नहीं लगता है तो वह यहां से चली जाएं. जब समरीन ने कहा कि दूसरी टीचर भी सिंदूर और मंगलसूत्र पहनकर अपने मजहब को फॉलो करती हैं, तो जवाब में मैनेजमेंट की ओर से कहा गया कि यह समानता का मामला है. साथ ही उनसे कहा गया कि जहां उन्हें सही लगे, वह वहां जाकर काम करें.