Waqf Act News: वक्फ एक्ट 2025 की हिमायत में सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं. जिसमें पुराने कानून को संविधान के खिलाफ बताया हुआ है. पूरी खबर पढ़ने के लिए स्क्रॉल करें.
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Waqf Act News: वक्फ एक्ट 2025 की सपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट में एक दखल देने वाली याचिका दायर की गई है. इसमें कहा गया है कि संशोधन भारत के संविधान की योजना के मुताबिक है. दखल देने वाला आवेदन कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए किया गया है.
अखिल भारत हिंदू महासभा के मेंबर सतीश कुमार अग्रवाल और गैर सरकारी संगठन हिंदू सेना के चीफ विष्णु गुप्ता ने वक्फ (संशोधन) बिल को चुनौती देने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए ये आवेदन दायर किए हैं. इस एप्लीकेशन में कहा गया इस कानून से किसी के अधिकार का हनन नहीं होता है, न ही मुस्लिम समाज इससे मुतास्सिर होता है.
आवेदनों में कहा गया है, "वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा-40 के अध्ययन से पता चलता है कि वक्फ बोर्ड को किसी भी प्रोपर्टी के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का अधिकार है, जिसके बारे में उसके पास यह यकीन करने की वजह है कि वह वक्फ प्रोपर्टी है और ऐसी प्रोपर्टी को वक्फ संपत्ति घोषित किया जाता था. इसलिए, धारा-40 की आड़ में वक्फ बोर्ड ने वक्फ प्रोपर्टी के नाम पर दूसरों की लाखों एकड़ जमीन हड़प ली. इसलिए, संसद को वक्फ अधिनियम, 1995 के प्रावधान में संशोधन करने के लिए अपनी विधायी शक्ति का प्रयोग करने के लिए बाध्य होना पड़ा."
एडवोकेट बरुण सिन्हा के जरिए से दायर आवेदनों में आगे कहा गया है कि धार्मिक प्रथाओं के आधार पर कोई कानून नहीं बनाया जा सकता है, जिसमें दूसरों की जमीन और संपत्ति को हड़पने की अप्रतिबंधित शक्ति हो.
एप्लीकेशन में आगे कहा गया है,"इसलिए, वक्फ अधिनियम, 1954 और उसके बाद वक्फ अधिनियम, 1995 भारत के संविधान की मूल योजना के खिलाफ है. जैसा भी हो, संसद ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2024 द्वारा कठोर प्रावधानों में संशोधन किया है। इसलिए, संशोधन में कोई दुर्बलता, अवैधता नहीं है."
भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ 16 अप्रैल को इस अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट आवेदन भी दायर किया था, जिसमें अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सरकार का पक्ष सुनने की गुजारिश की गई थी.
इस एक्ट को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें कहा गया कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण है और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी, जिसे पहले संसद के दोनों सदनों में गरमागरम बहस के बाद पारित किया गया था.