)
West Bengal: बिरभूम जिले में गुरुवार को 95 साल के एक बुज़ुर्ग ने अपनी बेटी के घर में आत्महत्या कर ली परिवार का आरोप है कि उन्होंने यह कदम एसआईआर (SIR) के डर की वजह से उठाया. यह तीन दिनों में पश्चिम बंगाल में इस तरह का दूसरा मामला है.
बुधवार को कूचबिहार में भी एक व्यक्ति ने आत्महत्या की कोशिश की थी, जिसको लेकर परिवार का कहना था कि उसने एसआईआर के डर की वजह से ऐसा किया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन घटनाओं को लेकर बीजेपी पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि बीजेपी डर, नफरत और बंटवारे की राजनीति कर रही है.
ममता ने बीजेपी पर हमला मिदनापुर के निवासी क्षितिश मजूमदार के मामले का ज़िक्र किया, जिन्होंने आत्महत्या की थी. परिवार के मुताबिक, वे पिछले 40 साल से बांग्लादेश के बरीसल से भारत आए थे और डिटेंशन कैंप भेजे जाने या देश से बाहर निकाले जाने के डर से परेशान थे. उनकी बेटी ने बताया कि 2002 में हुए एसआईआर के दौरान उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं था.
इसी तरह, उत्तर 24 परगना के पनिहाटी इलाके में 57 वर्षीय प्रदीप कर ने भी मंगलवार को आत्महत्या कर ली. पुलिस कमिश्नर मुरलीधर शर्मा ने मृतक के घर जाकर जांच की और बताया कि प्रदीप ने अपने कथित सुसाइड नोट में लिखा था,"एनआरसी मेरी मौत की वजह है."
वहीं, कूचबिहार के दिनहाटा स्थित जीतपुर गांव में खैरुल शेख नामक व्यक्ति ने भी ज़हर खा लिया. परिवार का कहना है कि खैरुल अपने वोटर कार्ड और आधार कार्ड में नाम की गड़बड़ी को लेकर परेशान था और उसे डर था कि उसका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है. फिलहाल खैरुल को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.