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Habra News Today: देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत बढ़ती जा रही है. यूपी, उत्तराखंड, असम, बिहार और महाराष्ट्र समेत दूसरे प्रदेशों में धार्मिक आधार पर निशाना बनाया जा रहा है. वहीं, बीते दिनों केंद्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा और आर्थिक राजधानी मुंबई में बांग्ला भाषी मुसलमानों पर पुलिस के जरिये कथित प्रताड़ित करने की घटनाएं सामने आई हैं. इसकी वजह से दूसरे राज्यों में रह रहे बांग्ला भाषी मुसलमानों में खौफ दहशत फैल गई है.
इसी तरह का एक मामला पश्चिम बंगाल के नार्थ 24 परगना जिले से सामने आई है. जिले के हाबड़ा के रहने वाले गुलाम मंडल नाम के शख्स की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. वह दूसरे प्रदेशों में मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते थे. गुलाम मंडल हालिया दिनों महाराष्ट्र से वापस लौटे थे, वे मुंबई में रहकर मजदूरी करते थे. बीते दिनों पुलिस ने बंगाली बोलने की वजह से हिरासत में ले लिया था और उन पर बांग्लादेशी होने के आरोप लगाए थे.
मिली जानकारी के मुताबिक, मुंबई में पुलिस ने बंगाली भाषा बोलने की वजह से हिरासत में ले लिया था. पुलिस ने आरोप लगाया था कि गुलाम मंडल 'बांग्लादेशी' हैं और अवैध रुप से मुंबई में रह रहे हैं. हिरासत के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर उनकी बेरहमी से पिटाई की. बाद में पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया.
मुंबई पुलिस की पिटाई से गुलाम मंडल की हालत बिगड़ गई. इसके बाद उन्हें 'देश बचाओ मंच' (देष बचाओगना मंच) नाम के मानवाधिकार संगठन की मदद से जेल से रिहा कराया गया और फिर वह अपने हाबड़ा अपने घर लौट आए. जेल से रिहाई के बाद गुलाम को मुंबई निगम के एक खाली कार्यालय की एकांत कमरे में रखा गया, जहां उन्हें खाने के लिए सिर्फ चावल मिलते और पीने का पानी बमुश्किल मिल पाता था.
पुलिसिया प्रताड़ना की वजह से गुलाम काफी डर गए थे. आलम यह था कि इसकी वजह से वह असहनीय दर्द से गुजर रहे थे और उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया था. इसकी वजह से गुलाम मंडल की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ती चली गई. नतीजतन वह काम छोड़कर बड़ी मुश्किल से अपने घर पहुंचे. पुलिस का खौफ और जेल में की गई बेरहमी से पिटाई से उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ गया.
इतवार (24 अगस्त) को गुलाम मंडल की हालत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद परिजनों से किसी तरह से उन्हें आनन फानन में अस्पताल में भर्ती कराया, जब उनकी हालात में सुधार नहीं हुआ तो परिजन वापस घर ले आए. सोमवार (25 अगस्त) की सुबह गुलाम की मौत हो गई. यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.
अखबार मशरिक में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, गुलाम मंडल की आखिरी रस्म अभी तक नहीं अदा की गई है. इस खबर की जानकारी मिलते ही तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल उनके घर की ओर रवाना हो गया है. इस संबंध में अभी तक गुलाम मंडल के परिजनों का या पुलिस प्रशासन का कोई ऑफिशियल बयान नहीं आया है. इस घटना ने एक बार फिर मुसलमानों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.