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West Bengal News Today: पश्चिम बंगाल में भी कथित गौरक्षकों का आतंक बढ़ता जा रहा है. राज्य के कूचबिहार जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर कथित गौ-रक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक, कूचबिहार में घर का खर्च चलाने के लिए मवेशी को उसके मालिक तक पहुंचाने निकले 52 साल के मोंटू मियां की लाश अगले दिन नदी के पुल के नीचे मिली. उनके अहल-ए-खाना का इल्जाम है कि रास्ते में कथित गौरक्षकों ने उन्हें रोक लिया, बेरहमी से पीटा, चेहरे और जिस्म पर तेजाब डाला और फिर उनकी लाश नदी में फेंक दी. हालांकि पुलिस ने इन इल्जामात की तस्दीक नहीं की है, लेकिन मुकदमा दर्ज कर मामले की तहकीकात शुरू कर दी है.
मजदूरी करके घर चलाते थे मोंटू मियां
मोंटू मियां कूचबिहार जिले के सीतलकुची इलाके की गोलेनावहाटी ग्राम पंचायत के नगर शिंगीमारी गांव के रहने वाले थे. वह पेशे से मवेशियों को बाजार से खरीदने वाले लोगों के घर तक सुरक्षित पहुंचाने का काम करते थे और इसी मेहनत-मजदूरी से अपने अहल-ए-खाना का गुजारा चलाते थे.
इलाके के लोगों के मुताबिक, हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद सीतलकुची थाना इलाके के कई मवेशी बाजार करीब दो महीने से बंद थे. शनिवार को गोसाई बाजार का मवेशी बाजार दोबारा खुला, जहां आसपास के गांवों से बड़ी तादाद में खरीदार और कारोबारी पहुंचे.
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि पाथानतुली गांव के रहने वाले याकूब मियां ने बाजार से एक गाय खरीदी और मोंटू मियां से उसे अपने घर पहुंचाने की गुजारिश की. चश्मदीदों के मुताबिक, शनिवार शाम मोंटू मियां गाय लेकर पैदल निकले थे, लेकिन उसके बाद वह कभी घर वापस नहीं लौटे.
रात तक घर नहीं पहुंचने पर उनके घरवालों की बेचैनी बढ़ गई. अहल-ए-खाना और गांव के लोगों ने पूरी रात उनकी तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला. इतवार सुबह स्थानीय मछुआरों ने खुटामारा नदी के पुल के नीचे एक लाश देखी. खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला. बाद में उसकी पहचान मोंटू मियां के रूप में हुई. जिस गाय को वह लेकर जा रहे थे, वह भी घटनास्थल के पास मिली, जिसकी पहचान उसके मालिक ने कर ली.
स्थानीय अखबार के दावे से मचा हड़कंप
मोंटू मियां के घरवालों का कहना है कि उनकी मौत से पहले उनके साथ बेहद बेरहमी से मारपीट की गई. परिवार ने स्थानीय अखबार की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि उनके कई दांत टूटे हुए थे और पूरे जिस्म पर चोट के गहरे निशान थे. उनका यह भी इल्जाम है कि चेहरे और बदन के कुछ हिस्सों पर तेजाब डाला गया और उसके बाद लाश को नदी में फेंक दिया गया. हालांकि इन तमाम दावों की पुलिस ने अभी तक तस्दीक नहीं की है.
मोंटू मियां के ससुर तारिक मियां ने इल्जाम लगाया कि उनके दामाद को खुद को गौरक्षक बताने वाले लोगों ने निशाना बनाया. उन्होंने कहा, "उन्होंने मेरे दामाद की जान ले ली, चेहरे और जिस्म पर तेजाब डाला और फिर नदी में फेंक दिया. हमारी मांग है कि पूरे मामले की गहराई से तहकीकात हो और जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें कानून के मुताबिक सख्त सजा मिले."
मोंटू मियां की बीवी आसिदा खातून ने बताया कि शनिवार शाम उनके शौहर ने फोन पर कहा था कि वह रात तक घर लौट आएंगे और अपनी सात साल की बेटी के साथ खाना खाएंगे. उन्होंने कहा, "जब वह रात तक नहीं लौटे तो हमने पूरी रात उनकी तलाश की. हमने कभी नहीं सोचा था कि उनका जिस्म घर से इतनी दूर नदी के नीचे मिलेगा."
इस मामले में सीतलकुची थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है. पुलिस ने बताया कि इस सिलसिले में मुकदमा संख्या 35/26 दर्ज कर लिया गया है और तहकीकात जारी है. हालांकि, मोंटू मियां के घरवालों का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के करीब 24 घंटे बाद तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी. पुलिस ने अब तक न तो परिवार के इल्जामात की पुष्टि की है और न ही किसी संदिग्ध का नाम सार्वजनिक किया है.
"पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे CPIM नेताओं पर बीजेपी समर्थकों का हमला"
यह मामला सियासी रंग भी ले चुका है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (CPIM) ने दावा किया है कि मोंटू मियां पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता थे. जिले के सीनियर नेताओं मोकसदुल इस्लाम, प्रोसेनजीत सरकार, नारायण चंद्र बर्मन और राखाल चंद्र सरकार ने उनके घर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की और हर तरह की कानूनी मदद का भरोसा दिया. मंगलवार को पार्टी की केंद्रीय समिति की सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी की अगुवाई में एक डेलीगेशन भी मोंटू मियां के घर जाने के लिए सीतलकुची पहुंचा.
इस दल में अलकेश दास, अनंत राय, अमित दत्त, मोकसेदुल आलम और प्रोसेनजीत सरकार भी शामिल थे. CPIM का इल्जाम है कि गांव पहुंचने से पहले उनके काफिले को बीजेपी के समर्थकों ने रोक लिया, गाड़ियों को घेर लिया और उन पर अंडे फेंके. मीनाक्षी मुखर्जी ने मीडिया से कहा कि यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने कहा कि वह थाना प्रभारी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगी और फौरन कार्रवाई की मांग करेंगी.