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West Bengal OBC Reservation: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार गठित होने के बाद सुवेंदु अधिकारी की सरकार के आदेश चर्चा में है. सुवेंदु अधिकारी सरकार के एजेंडे में कथिततौर पर मुख्य रूप से अल्पसंख्यक हैं. साल 2024 में सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि "अब सबका साथ, सबका विकास नहीं, बल्कि जो हमारे साथ, हम उनके साथ" कहा जाएगा. इतना ही नहीं, उन्होंने BJP से "माइनॉरिटी मोर्चा" को खत्म करने की पुरजोर वकालत की थी.
राज्य में आरक्षण को लेकर बीजेपी सरकार के एक फैसले की वजह से एक बार फिर सुवेंदु अधिकारी के पुराने बयान चर्चा में आ गए हैं. इसकी वजह है कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. बंगाल में सुवेंदु अधिकारी सरकार ने अदालत के आदेश के बाद बड़ा फैसला लेते हुए पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को 17 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है.
नए आरक्षण में इन वर्गों को किया गया है शामिल
इस फैसले के साथ ही कई समुदायों को फिर से पिछड़ा वर्ग की लिस्ट में शामिल कर नियमित मान्यता दे दी गई है. इस बदलाव का असर सरकारी नौकरियों से लेकर महाविद्यालयों में दाखिले तक पर पड़ने वाला है. मंगलवार (19 मई) को पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य की OBC आरक्षण सूची में बदलाव करते हुए कुल आरक्षण को 17 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया.
इतना ही नहीं, उन 66 समुदायों को नियमित मान्यता दी गई, जिन्हें साल 2010 से पहले राज्य की पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल किया गया था. नई सूची में कपाली, कुर्मी, नाई, तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा, पहाड़िया मुस्लिम, देवांगा और हज्जाम मुस्लिम समेत कई पारंपरिक सामाजिक समुदायों को शामिल किया गया है.
सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि इन समुदायों को अब सरकारी सेवाओं और पदों में 7 फीसदी आरक्षण का फायदा मिलेगा. यह व्यवस्था उन महाविद्यालयों में भी लागू होगी, जहां इस समय दाखिले की प्रक्रिया चल रही है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही नई सरकार ने राज्य की पुरानी OBC सूची को खत्म कर दिया था. इसके बाद कल्याण विभाग ने नया नोटिफिकेशन जारी कर आरक्षण व्यवस्था को फिर से लागू किया.
ममता सरकार ने की थी इन वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश!
इससे पहले ममता बनर्जी सरकार ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण को दो हिस्सों में बांटा था. इसमें ज्यादा पिछड़े वर्ग के लिए श्रेणी-ए के तहत 10 फीसदी और पिछड़े वर्ग के लिए श्रेणी-बी के तहत 7 फीसदी आरक्षण तय किया गया था. राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग श्रेणी-ए के तहत 80 से ज्यादा समुदायों और उप-जातियों को 10 फीसदी आरक्षण का फायदा दिया था. ममता सकरार का इस आरक्षण के जरिये मकसद था, उन वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े थे.
सुप्रीम कोर्ट ने 17 फीसदी आरक्षण को किया था बहाल
हालांकि, इस व्यवस्था को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. याचिकाओं में सवाल उठाया गया कि किन मानकों के आधार पर इन समुदायों को OBC सूची में शामिल किया गया. इसके बाद अदालत में इस पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सुनवाई शुरू हुई. पिछले साल भी महाविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया प्रभावित हुई थी. उस समय राज्य सरकार की 17 फीसदी पिछड़ा वर्ग आरक्षण लागू करने वाले नोटिफिकेशन पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी. इसकी वजह से दाखिलों में देरी हुई थी.
बाद में हाईकोर्ट ने इस रोक को हटा दिया, लेकिन 7 अगस्त को JEE एग्जाम से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि दाखिलों में वही पुरानी 7 फीसदी आरक्षण व्यवस्था लागू होगी, जो साल 2010 में प्रभावी थी. इसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची और राहत मिलने के बाद फिर से 17 फीसदी आरक्षण के आधार पर दाखिले शुरू किए गए.
हाईकोर्ट के आदेश को दोबारा किया गया बहाल
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग अधिनियम 2012 के तहत शामिल कई समुदायों की OBC मान्यता को रद्द कर दिया था. अदालत ने मई 2024 के अपने आदेश में कहा था कि कई समुदायों को पिछड़ा वर्ग का दर्जा देना कानून के मुताबिक नहीं था.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को जारी नई नोटिफिकेश इसी न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए लागू की गई. शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार से शुरू हुए केंद्रीकृत दाखिला पोर्टल में पिछड़ा वर्ग आरक्षण को संशोधित कर 7 फीसदी कर दिया गया है. विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि किसी तरह की भ्रम की स्थिति से बचने के लिए सरकार के निर्देश का इंतजार किया जा रहा था.
मुस्लिम उप-जातियों को लगा बड़ा झटका
पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण 17 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी करने का सबसे बड़ा असर उन समुदायों पर पड़ सकता है जो 2010 के बाद OBC सूची में शामिल किए गए थे. इनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदायों की बताई जाती है. साल 2010 में ममता सरकार ने 77 समुदाय को OBC आरक्षण सूची में शामिल किया था, इनमें से 75 मुस्लिम समुदाय से थे और जिनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति दलित-आदिवासियों से बदतर बताई जा रही थी.
हालांकि, साल 2024 में हाईकोर्ट ने OBC दर्जे को रद्द कर दिया था. जिनमें 75 मुस्लिम समुदाय शामिल थे. इसी आदेश को आधार बनाकर बीजेपी की नवगठित सुवेंदु सरकार ने OBC आरक्षण को 17 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी करने का आदेश दिया है. राज्य सरकार के इस आदेश के बाद कई मीडिया रिपोर्ट्सट में दावा किया गया है कि इसका सबसे बड़ा नुकसान मुस्लिम समुदाय को होगा, जिन्हें उप-जातियों के तहत इस वर्ग में शामिल किया गया था. यह मुस्लिम उप-जातियां अब बंगाल के किसी भी स्कूल, यूनिवर्सिटी या सरकारी नौकरी में OBC आरक्षण का फायदा नहीं उठा सकेंगे.