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West Bengal News Today: पश्चिम बंगाल में वक्फ एक्ट को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पहले से विवादित वक्फ कानून का विरोध कर रही है. आलम यह था कि वक्फ कानून के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने गुस्से में कांच की बोतल फेंक दी थी, जिससे उनके दाहिने हाथ में खून तक निकल आया था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपने भाषणों में आश्वासन देती रही हैं कि वक्फ एक्ट पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया जाएगा.
हालांकि, बीते गुरुवार (27 नवंबर) को राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को खास निर्देश जारी किया. इसमें कहा गया है कि वक्फ संपत्तियों का पूरा ब्योरा केंद्र सरकार के 'उम्मीद' पोर्टल पर दर्ज किया जाए. इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं. कई लोगों का मानना है कि ममता सरकार भी अब संशोधित वक्फ कानून पर नरम पड़ती दिखाई पड़ रही है.
क्या ममता सरकार के सामने वक्फ एक्ट को है मानना मजबूरी?
वक्फ बोर्ड के कई अधिकारियों का कहना है कि यह निर्देश जारी करना जरूरी था. केंद्र सरकार ने विवरण दर्ज कराने की अंतिम तारीख 5 दिसंबर तय की है. अगर समयसीमा में पूरी जानकारी पोर्टल पर नहीं डाली गई, तो कानूनी स्थिति बदल सकती है. इसकी वजह से जिला अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं.
एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, 'उम्मीद' पोर्टल से पहले 'VAMSI' नाम का प्लेटफॉर्म था, जिसमें पश्चिम बंगाल की लगभग 80 फीसदी वक्फ संपत्तियां पहले ही दर्ज हैं. राज्य में कुल 8,063 वक्फ संपत्तियों के अंतर्गत करीब 82,600 जायदादें आती हैं. एक वक्फ अधिकारी के मुताबिक, मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन संपत्तियों की जानकारी दर्ज करने पर अदालत की कोई रोक नहीं है. इसलिए अगर लंबित कानून के किसी हिस्से पर अमल नहीं किया गया तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं.
'वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की डेडलाइन बढ़ाने की मांग'
प्रशासन के कुछ अधिकारियों का कहना है कि पूरी व्यवस्था इस समय SIR सिस्टम पर आधारित है, ऐसे में अचानक जारी की गई इस गाइडलाइन से दबाव बन गया है. वहीं, राज्य सरकार में मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने बड़ा सवाल खड़ा किया है. उनका कहना है कि इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण कैसे मुमकिन है. सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री से बात करके समय सीम बढ़ाने की मांग की है.
मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी के मुताबिक, पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने के लिए 46 तरह की जानकारियां देनी होंगी, जैसे संपत्ति कब वक्फ हुई, कितनी सीमा है, मुतवल्ली कौन है, बैंक खाता है या नहीं, बाजार दर क्या है वगैरा वगैरा. इतना काम जल्दी पूरा होना मुश्किल है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि निर्देश देर से जारी करने में सरकार की गलती नहीं बल्कि वक्फ बोर्ड ने अपना काम समय पर पूरा नहीं किया.
कोलकाता के मेयर ने की वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की वकालत
अखबारे मशरिक में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता की मेयर और राज्य मंत्री फिरहाद हाकिम ने कहा कि वे आज भी वक्फ एक्ट के विरोध में हैं, लेकिन संपत्तियां पोर्टल पर डालने में दिक्कत क्या है? इससे जमीन सरकार की निगरानी में रहेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी. इसी बीच इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक और फुरफुरा शरीफ के पीरजादा ने कहा कि मुख्यमंत्री कहती हैं कि यह कानून राज्य में लागू नहीं होगा, जबकि उनकी ही सरकार उसके पालन के आदेश दे रही है.