Israel Attack Syria: इजराइल ने सीरिया पर द्रूज समुदाय को बचाने के लिए हमला किया था. यहां, तक की इजराइल ने बयान जारी करते हुए कहा था कि अगर इस समुदाय को नुकसान पहुंचता है तो यह नई सरकार के लिए अच्छा नहीं होगा.
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Israel Attack Syria: फिलिस्तीन, लेबनान और यमन के बाद अब इज़रायली सेना ने सीरिया की राजधानी दमिश्क में राष्ट्रपति भवन के पास हमला किया. ये हमले शुक्रवार सुबह किए गए. खास बात यह रही है कि अटैक राष्ट्रपति भवन के एकदम पास हुआ, मानों इजराइल सीरिया की नई सरकार को चेतावनी दे रहा हो कि वह कुछ भी कर सकता है. इस हमले की अहम वजह द्रूज अल्पसंख्यक समुदाय है. जिसकी हिफाजत की इजराइल ने कसम खाई है.
द्रूज समुदाय और सीरिया समर्थक हथियारबंद लड़ाकों के बीच हाल ही में संघर्ष हुआ था, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने द्रूज समुदाय को महफूज करने की बात कही थी और सीरियाई गुटों को चेतावनी दी थी कि अगर इस समुदाय को कुछ होता है तो नई सरकार के लिए अच्छा नहीं होगा.
सीरिया के गृह मंत्रालय का कहना है कि हालात अब कंट्रोल में हैं. उन्होंने बताया कि दमिश्क के पास साहनाया इलाके में बुधवार रात झड़पें हुई थीं. यह इलाका द्रूजों की घनी आबादी वाला इलाका है.
द्रूज एक छोटा लेकिन बेहद अहम जातीय-धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है, जिसकी आबादी लेबनान, सीरिया, इज़रायल और जॉर्डन में फैली है. इनकी धार्मिक शास्त्र इस्लामिक तत्वों को प्राचीन परंपराओं से जोड़ता है. इसके साथ ही ये दोबारा जन्म लेने में यकीन रखते हैं. यह 11वीं शताब्दी में इस्लाम के एक फिरके से ही निकला है.
द्रूज समुदाय में धर्म परिवर्तन की इजाजत नहीं होती. इसके साथ ही कोई दूसरे धर्म का शख्स द्रूज धर्म को नहीं अपना सकता है. जन्म से ही कोई शख्स द्रूज होता है और पूरी जिंदगी उसी पहचान को बनाए रखता है. यह समुदाय इस्माइली शिया शाखा से निकला है. ये एक खुदा में यकीन रखते हैं. जिसे वह अल-हकीम कहते हैं. द्रूजों की अनुमानित आबादी 10 लाख है. ये शिया समुदाय के इस्माइली फिरके से निकला है.
- सीरिया में ये अहम तौर पर सुवेदा प्रांत, दमिश्क के उपनगर जरामाना और साहनाया में रहते हैं.
- लेबनान में चौफ और माउंट लेबनान इलाके में इनकी बड़ी संख्या है.
- इज़रायल में करीब 1.5 लाख द्रूज रहते हैं, जो कुल आबादी का लगभग 1.6% हैं.
- जॉर्डन में इनकी छोटी आबादी है, जो सीरिया की सीमा के पास मौजूद है.
सीरिया द्रूज के लिए कैसा रहा है?
सीरिया में द्रूजों ने लंबे वक्त तक सिविल वॉर में स्टेबल रहने की कोशिश की है. उन्होंने बशर अल-असद सरकार के साथ एक शांतिपूर्ण समझौता किया था और इलाकाई खुदमुखतारी को बनाए रखा था. लेकिन वक्त के साथ ये समुदाय आर्थिक तौर पर कमजोर और सांप्रदायिक हिंसा का शिकार होने लगा. ईरान समर्थित मिलिशिया की बढ़ती दखलंदाजी के बाद द्रूज समुदाय ने आंदोलन और विद्रोह शुरू किया.