Alcohol is Haram or Halal in Islam: हाल ही में सऊदी अरब सरकार ने कई जगहों पर शराब स्टोर्स खोलने का ऐलान किया है, जिसके बाद इस्लाम में शराब को हराम करार देने और सऊदी के उदार बनने को लेकर नई बहस छिड़ गई है. सऊदी सरकार के इस फैसले ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. विवाद, कयास और पूर्वग्रह से पहले आइये समझते हैं कि इस्लाम में शराब पर क्यों है पूरी तरह से प्रतिबंध, शरीयत और साइंस के लिहाज से भी.
Trending Photos
)
Alcohol Haram in Islam: दुनिया में ईसाइयत के बाद सबसे ज्यादा इस्लाम के मानने वाले हैं. प्यू रिसर्च रिपोर्ट में इस्लाम को दुनिया का सबसे तेजी से फैलने वाला मजहब बताया जा रहा है. बीते एक दशक में 21 फीसदी के साथ दुनियाभर में मुस्लिम आबादी 24 से 25 फीसदी तक पहुंच गई है. भारत के दक्षिणपंथी और वेस्ट के कट्टर यहूदी, ईसाई, इस्लाम को तलवार के जोर पर फैलने वाला मजहब करार देते हैं, लेकिन कई एक्सपर्ट्स और इतिहासकार उनके आरोपों को ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर प्रोपैगेंडा और गलत बताते हैं.
इस्लाम पर रिसर्च करने वाले एक्सपर्ट के मुताबिक, कुछ सालों में जिस तरह इस्लाम को लोग अपना रहे हैं, उनके आरोप निराधार साबित हुए हैं. पश्चिमी और यूरोपीय देशों के विद्वान इस्लाम के फैलने की वजह से, इसमें मौजूद कई अच्छाईयों को श्रेय देते हैं. जिनमें छूआछूत, जुआ, नशाखोरी पर प्रतिबंध और दूसरों के साथ हुस्न सलूक शामिल है. इस्लाम में शराब और नशाखोरी को हराम करार देने को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं. हालांकि, कुछ अरसे से सऊदी अरब और मिडिल ईस्ट के कुछ देशों में शराब से प्रतिबंध को हटाना शुरू कर दिया है. हरमैन की सरजमीं सऊदी में हालिया दिनों में सरकार ने दो शराब स्टोर्स खोलने की इजाजत दी है.
इस पर कई मुस्लिम स्कॉलर्स और यहां तक की दूसरे धर्म के लोगों ने भी नाराजगी का इजहार किया है. इस वजह से एक बार फिर इस्लाम में शराब के हराम होने पर बहस छिड़ गई है. आइये जानते हैं, इस्लाम में शराब क्यों है हराम? इस्लाम में शराब को पूरी तरह हराम (निषिद्ध) करार दिया गया है. कुरआन की कई आयतें और नबी-ए-पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जुड़ी हदीसें साफ तौर पर यह बताती हैं कि शराब इंसान, समाज और इबादत, तीनों के लिए नुकसानदेह है. शराब को हराम करार देने की पाक कुरआन में कई जगह जिक्र किया गया है.
शराब पर पाबंदी कुरआन की नजर से?
कुरआन में शराब को हराम करार देने की वजह धीरे-धीरे और हिकमत के साथ पूरी की गई है. सबसे पहले सूरह अल-बकरा (2:219) में शराब और जुए का जिक्र आया है. इसमें बताया गया कि भले इनमें कुछ मामूली फायदे हों, लेकिन इनका नुकसान कहीं ज्यादा है. यह आयत शराब के दिमागी और सामाजिक नुकसान की तरफ पहला इशारा करती है. इसके बाद दूसरी मनाही सूरह अन-निसा (4:43) में आई है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया कि नशे की हालत में नमाज के करीब न जाओ, जब तक कि यह न समझ लो कि तुम क्या पढ़ रहे हो. इससे साबित होता है कि नशा इंसान की सोच, इबादत और समझदारी पर सीधा असर डालती है.
आखिर में शराब पर पूरी तरह और बिना किसी शक शुबह के पाबंदी का जिक्र सूरह अल-माइदा (5:90–91) में किया गया है. इन आयतों में शराब, जुए को 'नापाक, गंदा और शैतानी काम' बताया गया है. कुरआन कहता है कि शैतान इसके जरिए इंसानों के बीच दुश्मनी, नफरत और फसाद पैदा करता है और उन्हें अल्लाह की याद और नमाज से दूर करता है. यही आयत शराब को हमेशा के लिए हराम करार देती है.
'शराब पीना, पिलाना और इससे जुड़ा कारोबार भी है हराम'
कुरआन के बाद हदीसों को इस्लाम का दूसरा सबसे विश्वसनीय स्रोत माना जाता है. हदीसों में भी शराब की पाबंदी बहुत स्पष्ट रूप से बयान की गई है. पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सही मुस्लिम की एक हदीस में फरमाया कि जिस चीज की ज्यादा मात्रा नशा पैदा करे, उसकी थोड़ी मात्रा भी हराम है. यानी नशे का असर चाहे कम हो या ज्यादा, वह हर हाल में इस्लाम में ममनू (वर्जित) है.
सुन्नन नसाई की एक और हदीस में शराब को 'उम्मुल-खबाइस' यानी तमाम बुराइयों की जड़ बताया गया है. इसकी वजह है कि नशा इंसान की अक्ल और सोचने समझने की सलाहियत छीन लेता है और उसे ऐसे गुनाहों (गलत कामों) की तरफ ले जाता है जो वह शायद वह होश में रहते हुए कभी न करे. वहीं सही मुस्लिम की एक मशहूर हदीस में शराब से जुड़े हर काम चाहे पीना हो, पिलाना हो, बेचना, खरीदना, बनाना या ढोना, सब पर लानत (धिक्कार) भेजी गई है. इस तरह हदीसें साफ तौर पर दिखाती हैं कि शराब सिर्फ पीना ही नहीं बल्कि उससे जुड़ा कोई भी कारोबार इस्लाम में सख्त तौर पर नाजायज और हराम है.
इसे भी पढ़ें: शराब के सेवन पर WHO ने भी वही कहा, जो सदियों से कहता आ रहा है इस्लाम
इस्लाम में शराब कब और कैसे हराम हुई?
इस्लाम में शराब (खमर) की मनाही अचानक नहीं आई बल्कि यह तीन अलग-अलग चरणों में धीरे-धीरे लागू की गई. हर चरण में अल्लाह की तरफ से एक नया हुक्म उतरा, जो आखिरकार शराब को पूरी तरह हराम करार देने पर जाकर खत्म हुआ. यह प्रक्रिया इस्लामी इतिहास की सबसे मशहूर घटनाओं में से एक है. इस्लाम में शराब को हराम किए जाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे तीन चरणों में पूरी हुई.
सबसे पहले सूरह अल-बकरा (2:219) में यह चेतावनी दी गई कि शराब और जुए में भले कुछ फायदे हों, लेकिन उनका नुकसान उनसे कहीं ज्यादा है. यह शुरुआती संकेत था कि नशा इंसान और समाज दोनों के लिए नुक्सानदेह है. इसके बाद दूसरा हुक्म सूरह अन-निसा (4:43) में उतरा, जिसमें कहा गया कि नशे की हालत में नमाज के करीब न जाओ. उस दौर में शराब पीना आम था, इसलिए इस आयत के बाद लोगों ने पीना कम कर दिया, लेकिन आदत अभी बाकी थी.
आखिर में पूरी तरह से शराब की मनाही सूरह अल-माइदा (5:90–91) में आई, जहां शराब, जुआ और इसी तरह की चीजों को शैतान के गंदे काम बताया गया और उनसे पूरी तरह बचने का आदेश दिया गया. यही वह हुक्म था जिसने शराब को हमेशा के लिए हराम कर दिया और इस्लामी कानून में उसकी निषेधाज्ञा को पूरी तरह से स्थापित कर दिया है. इसके बाद इस्लाम में दुनिया के कायम रहने तक यानी कयामत तक शराब के इस्तेमाल पर पाबंदी लग गई.
नबी (PBUH) के मदनी जिंदगी में शराब हुई हराम
जब शराब की हराम होने से जुड़ी आखिरी आयत उतरी, तो पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक सहाबी को भेजकर पूरे मदीना में यह ऐलान करवाया कि "आज से शराब हमेशा के लिए हराम कर दी गई है." यह ऐलान सिर्फ एक हुक्म नहीं था बल्कि मदीना का माहौल अचानक बदल गया और शहर में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो इस्लामी इतिहास का सबसे अनोखा और यादगार पल बन गया.
जब यह ऐलान हुआ उस मदीना में कई लोग शराब पी रहे थे, लेकिन जैसे ही उनके कानों में यह बात पड़ी कि शराब हराम हो चुकी है. उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपने हाथों के प्याले जमीन पर पटक दिए. किसी ने यह नहीं सोचा कि बस एक घूंट और…या थोड़ा सा पी ले. जिस लम्हा हुक्म आया, उसी वक्त उन्होंने खुद को रोक लिया. यह उनके इमान की मजबूती और अल्लाह के हुक्म के प्रति सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है.
मदीना की गलियों में बहने लगी शराब
इतना ही नहीं, जिन घरों में शराब के मटके, बोतलें या घड़े रखे थे, उन सबको लोगों ने तुरंत उठाया और सड़क पर उड़ेल दिया. इतिहासकार बताते हैं कि उस दिन मदीना की गलियों में शराब की धाराएं बह रही थीं, जैसे किसी इलाके में जोरदार बारिश के बाद पानी बहता है. किसी ने यह नहीं सोचा कि इसे बचा लिया जाए, छुपा लिया जाए या किसी और काम में ले लिया जाए. नबी-ए-पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ से हुक्म आया था और पूरा शहर ने एकजुट होकर उसे मान लिया और बाद में पूरे आलमे-इस्लाम, दुनियाभर के मुसलमानों ने इसको अपनाया.
शराब, साइंस के लिहाज से भी है नुकसानदेह
वैज्ञानिक रिसर्च और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट्स बताती है कि शराब का कोई भी स्तर सुरक्षित नहीं है. शराब का एक्टिव एलिमेंट एथेनॉल एक ग्रुप-1 कार्सिनोजेन है, जो इंसानी जिस्म के लगभग हर हिस्से को नुकसान पहुंचाता है. रिसर्च और स्टडी बताते हैं कि शराब दिमाग की सोचने, समझने और याद रखने की ताकत को कमजोर करती है, लत लगाती है. इसका जिक्र इस्लाम में भी किया गया है.
इतना ही नहीं शराब लिवर को नुकसान पहुंचाकर सिरोसिस और लिवर कैंसर की वजह बनती है. WHO के मुताबिक, रोजाना थोड़ा सा भी शराब का इस्तेमाल भी कैंसर, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट फेलियर के खतरे को बढ़ा देता है. गर्भवती औरतों में यह बच्चों में फीटल अल्कोहल सिंड्रोम जैसी गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है. द लैंसेट के मुताबिक, शराब की सबसे सुरक्षित मात्रा 'शून्य' है यानी शराबी की थोड़ी सी मात्रा भी लंबे समय तक सेहत पर बुरा असर डालती है.
यह भी पढ़ें: हरमैन की पाक सरजमीं पर शराब की इजाजत! सऊदी हुकूमत के फैसले से उम्मत में गहरा सदमा