रोज़ 48 बार मातृभूमि को चूमते हैं मुसलमान, लेकिन 'वन्दे मातरम' बोलने से क्यों करते हैं परहेज ?

Vande Mataram Muslim controversy: देश के नागरिकों से राष्ट्र गीत के तौर पर वन्दे मातरम को गवाया जाना न तो कोई कानून बाध्यता है, न ही संविधान में ऐसा कोई प्रावधान है. इसके बावजूद सरकार जबरन इसे स्कूल कालेजों और मदरसों में लागू करने पर तुली हुई है. वहीँ, मुसलमान इसका विरोध कर रहे हैं. आखिर 'वन्दे मातरम्' गाना इस्लाम के किस नियम से टकराव पैदा करता है, और मुसलमान इसका क्यों विरोध करते हैं. आइये इस रिपोर्ट में देखते हैं.

रोज़ 48 बार मातृभूमि को चूमते हैं मुसलमान, लेकिन 'वन्दे मातरम' बोलने से क्यों करते हैं परहेज ?

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Hussain Tabish

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हुसैन ताबिश Zee News  में एसोसिएट न्यूज़ एडिटर हैं. वो Salaam TV और JK & Ladakh TV के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की टीम को लीड करते हैं. उन्हें फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क पर ख़बरों से खेलने का लगभग 18 सालों का अनुभव है. Zee से पहले वो HT Media, Amar Ujala, Prasar Bharti, Raj Express, Forward Press, Mahanagar Media Network Ltd, BIG Pvt. Ltd. और 'देशबंधु' अखबार जैसे संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क पर संपादन की भूमिका निभा चुके हैं. वह भारत सरकार के ICSSR-फंडेड मीडिया रिसर्च प्रोजेक्ट में रिसर्च एसोसिएट रह चुके हैं. उन्हें हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली विधान सभा चुनावों के पहले ओपिनियन पोल सर्वे करने का अनुभव है. बिहार में मुस्लिम महिलाओं में शिक्षा का निम्न स्तर, अकुशल मजदूरों के पलायन और इंसेफेलाइटिस पर रिपोर्टिंग के लिए उन्हें फेलोशिप मिल चुका है. एम.फिल और पी.एचडी की शिक्षा प्राप्त हुसैन ताबिश एक पत्रकार के अलावा मीडिया शोधार्थी, शिक्षक और प्रशिक्षक भी हैं. वो जर्नलिज्म के स्टूडेंट्स को इंडियन पॉलिटी, रिपोर्टिंग, एडिटिंग, मीडिया एथिक्स और कंटेंट प्रोडक्शन पढ़ाते हैं, फिर भी खुद को हमेशा जर्नलिज्म का इंटर्न मानते हैं. राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध, मानवाधिकार, जेंडर सेंसिटिविटी, सोशल जस्टिस और माइनॉरिटी इश्यूज उनके प्रिय विषय हैं. (उनतक पहुँचने का पता mohammad.tabish@India.com).  

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