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Eid-e-Milad-un-Nabi: मुसलमानों का पवित्र महीना रबी उल अव्वल शुरू हो गया है. यह महीना इस्लाम और मुसलमानों के लिए काफी अहमियत रखता है, क्योंकि इसी महीने में इस्लाम के आखिरी पैगम्बर मोहम्मद (स.) की विलादत (जन्म) हुई थी. पैगम्बर मोहम्मद की विलादत सऊदी अरब के मक्का शहर के कुरैश खानदान में 12 रबी उल अव्वल 530 ई. को हुई थी. पैगम्बर मोहम्मद (स.) के दुनिया में आने के 40 वर्ष बाद अल्लाह ने कुरआन को नाजिल किया. पैगम्बर मोहम्मद (स.) ने अपनी जिंदगी में अरब समेत दुनिया के बड़े क्षेत्र पर इस्लाम को फैलाया. उन्होंने तत्कालीन अरब समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाया. ईश्वर के बहुदेववाद के खिलाफ उन्होंने एकेश्वरवाद के सिद्धांत को फैलाया..
दुनिया भर में इंसानों के बीच हर तरह की गैर- बराबरी को समाप्त किया. महिलाओं को पुरुषों के बराबर सम्मान दिया. समाज के गरीब और वंचित समुदाय के उत्थान के लिए जकात जैसे व्यवस्था और बराबरी का सन्देश दिया.
दुनिया भर के मुसलमान हर वर्ष पैगम्बर मोहम्मद (स.) की विलादत की याद में खुशियां मनाते हैं. इस दिन को ईद मिलादुन्नबी के रूप में मनाया जाता है.
इस साल 6 सितंबर को ईद मिलादुन्नबी मनाई जाएगी. इस दिन दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के लोग पैगम्मबर मोहम्मद (स.) की शिक्षाओं को लोगों को बताते हैं. कुछ लोग इस दिन रोजा भी रखते है. दान पुण्य करते हैं. कुछ लोग इस दिन जुलूस भी निकालते हैं.
हालांकि, ईद मिलादुन्नबी सभी मुसलमान सेलिब्रेट नहीं करते हैं.. इसको लेकर मतभेद है. कुछ लोग इसे आडम्बर मानते हैं.. मुसलमानों का वहाबी और देवबंदी फिरका ईद मिलादुन्नबी नहीं मनाता है, और इसे एक तरह का आडम्बर मानता है. उनकी दलील है कि पैगम्बर साहब ने खुद अपने जीवन में जन्मदिन मनाने से रोका था. उन्होंने कहा था कि ये यहूदियों का तरीका है, क्यूंकि यहूदी जन्मदिन मनाते हैं.
मुसलमानों में वैसे भी जन्मदिन मनाने का कोई कल्चर नहीं है. वहीँ दूसरी तरफ भारत और दुनिया में बरेलवी या सूफी मत के मुसलमान पैगम्बर साहब का जन्मदिन धूमधाम से मनाते हैं. इसके पीछे उनके अपने तर्क हैं. हालांकि , पिछले कुछ सालों में ईद मिलादुन्नबी मनाने वालों की तादाद काफी बढ़ गयी है, लोग इसे उत्सव की तरह मनाने लगे हैं. मुस्लमान का एक तबका मानता है कि ये भारतीय संस्कृति के असर के कारण भारतीय इस्लाम है, जहाँ हिन्दुओं देवी- देवताओं के जन्मदिन से प्रभावित होकर लोग ईद मिलादुन्नबी मनाने लगे हैं.