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इजरायल में युद्ध के मूड में नहीं जनता, Iran-US टकराव से दूर रहना चाहते हैं नागरिक

Israel Public Opinion: इजरायल में हुए एक सर्वे से पता चला है कि ज़्यादातर नागरिक ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहते हैं. लोग चाहते हैं कि इजरायल तभी मिलिट्री कार्रवाई करे जब ईरान पहले हमला करे. तनाव के बीच जनता ने शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है.

इजरायल में युद्ध के मूड में नहीं जनता, Iran-US टकराव से दूर रहना चाहते हैं नागरिक

Iran US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव चरम सीमा पर है. अशंका जताई जा रही है कि अमेरिका किसी भी पल ईरान के खिलाफ मिलिट्री कार्रवाई कर सकता है. इस बीच ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तेहरान पर हमला हुआ, तो वह इजरायल को निशाना बनाएगा. इस ऐलान से इजरायल में डर का माहौल बन गया है. इजरायली लोग अमेरिका और ईरान के बीच संभावित टकराव में शामिल होने से बचना चाहते हैं. एक हालिया सर्वे से पता चलता है कि ज्यादातर इजरायली नागरिक इस टकराव से दूर रहना चाहते हैं और किसी भी युद्ध में हिस्सा लेने के पक्ष में नहीं हैं.

इजरायल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट द्वारा मंगलवार को पब्लिश किए गए एक नए सर्वे के मुताबिक, इस बात पर इजरायली लगभग बराबर बंटे हुए हैं कि देश को ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले में हिस्सा लेना चाहिए या नहीं. यह सर्वे इस्लामिक रिपब्लिक के साथ बढ़े तनाव के बीच किया गया था. 25-29 जनवरी को 755 यहूदी और अरब वयस्कों के एक प्रतिनिधि सैंपल के बीच किए गए इस पोल में पाया गया कि 50 फीसद उत्तरदाताओं का मानना ​​है कि इजरायल को ईरान पर तभी हमला करना चाहिए जब तेहरान पहले इजरायल पर हमला करे, जबकि 44 फीसद शुरू से ही इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ वाशिंगटन के साथ सीधे सैन्य भागीदारी का समर्थन करते हैं.

63 फीसद इजरायली नहीं चाहते हैं ईरान से युद्ध
वहीं, इजरायल में किए गए एक सर्वे से पता चला है कि लोगों के राजनीतिक विचार इस मुद्दे पर उनकी राय को प्रभावित करने वाला एक बड़ा फैक्टर हैं. लेफ्ट-लीनिंग विचार वाले यहूदी लोगों में से 63 फीसद और सेंट्रिस्ट विचार वाले लोगों में से 55 फीसद ने कहा कि इजरायल को तभी संघर्ष में शामिल होना चाहिए जब ईरान पहले हमला करे. वहीं, राइट-विंग विचार वाले 55 फीसद लोगों का मानना ​​है कि इजरायल को शुरू से ही संघर्ष में सीधे शामिल हो जाना चाहिए.

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नेतन्याहू के बयान पर क्यों मचा बवाल
सर्वे में एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी लोगों की राय जानी गई. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बयान कि इजरायल अगले दस सालों में संयुक्त राज्य अमेरिका से सैन्य सहायता को धीरे-धीरे कम करने और आखिरकार खत्म करने की योजना बना रहा है. नेतन्याहू ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि इजरायल रक्षा मामलों में "जितना संभव हो सके आत्मनिर्भर" बने. हालांकि, बड़ी संख्या में जवाब देने वालों ने अमेरिकी सैन्य सहायता में कमी पर चिंता व्यक्त की, इसे देश की सुरक्षा के लिए एक संवेदनशील फैसला माना.

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Tauseef Alam

तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now...और पढ़ें

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