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Afghanistan Foreign Minister in India: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत आने के बाद काफी सुर्खियों में हैं. दरअसल उन्होंने नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन इस दौरान महिला पत्रकारों को एंट्री नहीं दी गई. इस प्रतिबंध के बाद सोशल मीडिया पर तीखे रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं.
मुत्ताकी गुरुवार को भारत पहुंचे थे और उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी. दोनों नेताओं के बीच अफगानिस्तान के विकास में भारत के सहयोग, बाइलेट्रल बिजनेस, क्षेत्रीय अखंडता, जन-से-जन संबंधों और क्षमता निर्माण समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई. हालांकि, बाद में शुक्रवार शाम 3:30 बजे दूतावास में आयोजित मुत्ताकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में न तो बड़े पैमाने पर पत्रकारों को बुलाया गया और न ही महिला पत्रकारों को एंट्री दी गई.
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में हुई जब भारत तालिबान के साथ अपने संबंधों को लेकर बेहद सतर्क रुख अपना रहा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने हाल ही में अफगानिस्तान में भारतीय तकनीकी मिशन को दूतावास का दर्जा देने की घोषणा की थी. इसके बावजूद अधिकतर पत्रकारों को इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही उन्हें पीसी के दौरान एंट्री मिली.
गौरतलब है कि दिल्ली स्थित अफगान दूतावास अब भी पूर्व अशरफ गनी प्रशासन के राजनयिक मोहम्मद इब्राहीमखैल के नियंत्रण में है, जबकि मुंबई और हैदराबाद के अफगान वाणिज्य दूतावास पहले से ही तालिबान के अधीन हैं. आईएएनएस से बातचीत में कुछ पत्रकारों ने बताया कि उन्हें इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी शुक्रवार सुबह ही दी गई थी. कुल मिलाकर केवल 15-16 पत्रकारों को ही इसमें शामिल होने की इजाजत मिली थी.
महिला पत्रकारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर रखे जाने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल भेदभावपूर्ण है बल्कि प्रेस की आज़ादी के खिलाफ भी है. मुत्ताकी की मीडिया टीम द्वारा चुनिंदा पत्रकारों को बुलाने और प्रेस कॉन्फ्रेंस को सीमित दायरे में रखने की इस प्रक्रिया की मीडिया जगत में आलोचना हो रही है.
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और सीनियर कांग्रेस लीडर पी चिदंबरम ने नई दिल्ली में अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को बाहर रखे जाने पर फिक्र का इज़हार किया है. उन्होंने पुरुष पत्रकारों को अपनी महिला सहकर्मियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए इस कार्यक्रम का बहिष्कार करना चाहिए था.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "मैं इस बात से स्तब्ध हूं कि अफ़ग़ानिस्तान के श्री आमिर खान मुत्ताकी द्वारा संबोधित प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को बाहर रखा गया। मेरे निजी विचार से, पुरुष पत्रकारों को तब बाहर चले जाना चाहिए था जब उन्हें पता चला कि उनकी महिला सहकर्मियों को बाहर रखा गया है.
कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की कड़ी आलोचना की और विदेश मंत्री एस जयशंकर के प्रति अपनी निराशा ज़ाहिर की है. उन्होंने कहा, "मैं उन भू-राजनीतिक मजबूरियों को समझता हूं जो हमें तालिबान के साथ बातचीत करने के लिए मजबूर करती हैं, लेकिन उनके भेदभावपूर्ण और आदिम रीति-रिवाजों को मानना बिल्कुल हास्यास्पद है. तालिबान मंत्री की प्रेस वार्ता से महिला पत्रकारों को बाहर रखने में विदेश मंत्रालय और एस जयशंकर का आचरण बेहद निराशाजनक है."