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Afghanistan News Today: अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की वापसी और शांति स्थापित होने के बावजूद स्थिति जस की तस है. यहां पर अभी करोड़ों लोग भूख और प्यास से निढ़ाल है. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने भी अफगानिस्तान में बिगड़ते मानवीय संकट को लेकर चेतावनी जारी की है. WFP ने कहा है कि इस गर्मी में एक करोड़ लोगों को तत्काल खाद्य सहायता की जरुरत है, लेकिन फंड के कमी की वजह से सिर्फ 10 लाख लोगों की मदद की जा सकेगी.
संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी यह संस्था ऐसे समय में चेतावनी दे रही है, जब अंतरराष्ट्रीय मदद में तेज गिरावट देखी जा रही है। इसका असर लाखों अफगान परिवारों पर पड़ा है, जो अब गरीबी, कुपोषण और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं. हालिया सालों में अफगानिस्तान में गरीबी ने तेजी से पांव पसारे हैं. 2015 से 23 के बीज में 5 फीसदी गरीबी बढ़ी, जबकि यहां की 65 फीसदी आबादी गरीबी में जी रही है.
गरीबी और आर्थिक मामलों के विश्लेषक अब्दुल जहूर मुदब्बिर ने कहा, "गरीबी को कम करने के लिए हमें दो रणनीतियों पर ध्यान देना होगा. पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रचनात्मक और प्रभावी संबंध बनाए रखना और दूसरा प्राकृतिक और मानव संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल करना." उन्होंने कहा कि अगर संसाधनों का सही तरीके से प्रबंधन हो तो अफगानिस्तान की हालत सुधर सकती है."
काबुल निवासी मोहम्मद जावेद का कहना है, "अगर मदद मिले तो काम चल जाता है, लेकिन जब काम मिल जाए तो मदद की ज़रूरत नहीं पड़ती." जावेद के मुताबिक, घर का खर्च चलाने और रोजमर्रा के गुजारा के लिए लोग ठेला लगाते हैं. हालांकि, यहां कार्ड बांटे जाते हैं, लेकिन वह उन्हीं तक ही पहुंचते हैं, जिनकी ऊपर तक जान पहचान हो. हमारे पास कोई साधन नहीं है."
अफगानिस्तान के आर्थिक मंत्रालय ने दावा किया है कि वह गरीबी और बेरोजगारी को कम करने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है. मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल रहमान हबीब ने कहा, "सिर्फ खाद्य सहायता से लोगों की जरूरतें पूरी नहीं होंगी. जब तक आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटते और अंतरराष्ट्रीय समुदाय रोजगार, परिवारों की मजबूती और लोगों की खरीद फरोख्त क्षमता बढ़ाने वाले नीतियों का समर्थन नहीं करता है, तब हालात नहीं बदलेंगे."
टोलो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में गरीबी और भुखमरी बढ़ने की कई वजहें हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अफगानिस्तान में हालिया सालों बेरोजागारी तेजी से बढ़ी, विदेशों से मिलने वाली मदद में कमी आई है. इसके अलावा प्राकृतिक आपदाएं, हेल्थ और एजुकेशन की कमी गरीबी बढ़ने वाली खास वजहे हैं.
एक्सपर्ट्स की मानें तो अफागनिस्तान में बुनियादी सुविधाओं की कमी, बेरोजगारी और भारी गरीबी की वजह से लोग प्रवास करने को मजबूर है. आलम यह है कि यहां के 60 फीसदी से ज्यादा बच्चे गरीब है और वह अपना पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर हैं. यहां हालात हर दिन बिगड़ते जा रहे हैं और समय रहते अंतरराष्ट्रीय मदद नहीं मिली तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं.