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West African Country Mali: पश्चिम अफ्रीका का देश माली इस समय खतरनाक गृहयुद्ध से घिरा हुआ है. अलग-अलग आतंकी घटनाओं में माली में जनवरी से फरवारी तक लगभग दो हजार लोगों की मौत हो चुकी है. माली की राजधानी बमाको पर अल-कायदा से जुड़ा आतंकी संगठन जमात नुसरत-उल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन (JNIM) अब तेजी से अपना पांव जमा रहा है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में पश्चिमी और अफ्रीकी अधिकारियों ने बड़ा खुलासा किया है. इस रिपोर्ट में अधिकारियों से हवाले से दावा किया गया है कि यह खतरनाक स्थिति माली को दुनिया का पहला ऐसा देश बना सकती है, जो अमेरिका के जरिये आतंकी संगठन घोषित ग्रुप के नियंत्रण में होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, अल-कायदा से जुड़े इस संगठन की माली में तेजी फैलता प्रभाव अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से शुरू हुआ है. अगर बमाको में सरकार गिर जाती है, तो यह पहली बार होगा जब अल-कायदा से सीधा जुड़ा हुआ कोई ग्रुप किसी देश की राजधानी पर नियंत्रण हासिला किया हो. नुसरत-उल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन के प्रभाव ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के प्रभाव को कम किया है, जिससे वहां की सरकारें और खुफियां एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं.
बीते कई हफ्तों से JNIM ने माली के राजधानी की घेरबंदी कर रखी है. खाने-पीने और रोजमर्रा की जरुरतों के साथ JNIM ने ईंधन की सप्लाई भी रोक दी है. इसकी वजह से माली में खाने पीने की भारी किल्लत हो गई है और सैन्य अभियान ठप पड़ गया है. यूरोपीय अधिकारियों ने बताया कि यह JNIM सीधा हमले की बजाय घेराबंदी कर आर्थिक और मानसिक रूप से (Slow Choke Strategy) सत्ता को कमजोर करता है ताकि वहां की व्यवस्थाएं चरमरा जाए.
फिलाडेल्फिया स्थित फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता राफेल बार्न्स ने कहा कि "हर वह दिन जो बिना घेरा हटे गुजर रहा है, बमाको को खतरनाक तबाही की ओर ले जा रहा है." उन्होंने बताया कि मौजूदा संकट सेना की ताकत को कमजोर कर रहा है, जो खुद ईंधन और गोला-बारूद की कमी से जूझ रही है.
जमात नुसरत-उल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन (JNIM) समूह की स्थापना 2017 में अल-कायदा से जुड़े कई धड़ों के एकीकरण से हुई थी. गठन के बाद से इस संगठन ने अल-कायदा के प्रति पूरी निष्ठा जताई है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लड़ाकों को अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अल-कायदा के नेताओं से बम बनाने की ट्रेनिंग मिली है.
हाल के दिनों में राजधानी की ओर जाने वाले ईंधन के काफिलों पर लगातार हमले हुए हैं. बागियों द्वारा जारी वीडियो में दिखाया गया है कि हाल ही की एक घटना में मस्लह बंद समूहों ने बमाको जाने वाले ट्रकों पर हमला किया, कई को जला दिया और बाकी वाहनों पर कब्जा कर लिया.
काती कस्बे के पास तैनात सरकारी फौज ईंधन की भारी कमी की वजह से कोई भी कार्रवाई करने में नाकाम है. हालात यह है कि ईंधन की किल्लत देश में सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. बमाको में एक लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग 2000 CFA फ्रैंक (करीब 3.5 डॉलर) तक पहुंच गई है, जो पहले की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा है.
माली के नागरिक इब्राहिम सिसे ने बताया, "आज किसी भी पेट्रोल स्टेशन पर ईंधन नहीं है, लोग बेजह इंतजार कर रहे हैं." इस संकट के चलते सरकार ने दो हफ्तों के लिए स्कूल, यूनिवर्सिटी और कई पावर प्लांट बंद कर दिए हैं. पिछले हफ्ते माली के प्रधानमंत्री अब्दुले माईगा ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा था कि "चाहे हमें पैदल या चम्मच से ही ईंधन ढूंढना पड़े, हम ढूंढेंगे."
पश्चिम अफ्रीका में अल-कायदा के बढ़ते प्रभाव को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ रही है. खासकर नाइजर, बुर्किना फासो और माली जैसे साहेल क्षेत्र के देशों में इसका असर तेजी से बढ़ा है. वहीं बेनीन, आइवरी कोस्ट, टोगो और घाना जैसे शांत देशों में भी यह समूह धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है.
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि माली पर अल-कायदा अपने नियंत्रण में ले सकता है. माल दुनिया का ऐसा पहला देश होगा, जहां पर अल-कायदा की सरकार होगी. माली का क्षेत्रफल 1,240,192 स्कावयर किलोमीटर है और यह अमेरिका कैलिफोर्निया से तीन गुना बड़ा है. अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि माली की 2.1 करोड़ की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है.