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America Qatar Security Agreement: इजरायल ने पिछले महीने (9 सितंबर) को कतर की राजधानी दोहा पर भीषण हवाई हमला करके विश्व की राजनीति में भूचाल ला दिया. इस हमले के बाद कतर समेत मिडिल ईस्ट के तमाम देशों में अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई. सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ मिलकर पारस्परिक सुरक्षा समझौता कर लिया. इस समझौते के मुताबिक सऊदी या पाकिस्तान पर किसी बाहरी देश का हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों देश एक दूसरे की सुरक्षा करेंगे. इसी प्रकार अब कतर ने भी अमेरिका के साथ सुरक्षा समझौता कर लिया है.
दरअसल, मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य एयरबेस कतर की राजधानी दोहा में मौजूद है. इसके बावजूद इजरायल ने कतर पर हमला किया और अमेरिका, कतर को बचाने में नाकामयाब रहा. इस घटना के बाद अमेरिका पर धोखेबाजी के इल्जाम लगे थे. अब एक बार फिर कतर ने अमेरिका पर विश्वास जताया है और बीते सोमवार को दोनों देशों के बीच बहुत बड़ा सुरक्षा समझौता हुआ. यह समझौता नाटो के आर्टिकल 5 जैसा है. क्योंकि इस समझौते के मुताबिक कतर पर कोई भी हमला होता है तो उसे अमेरिका पर हमला माना जाएगा और अमेरिका, कतर की सुरक्षा करेगा.
अमेरिका ने कतर को इस समझौते में सुरक्षा की पुख्ता गारंटी दी है. इससे पहले अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप की मध्यस्थता से इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कतर के बादशाह से माफी मांगी.
गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा कतर को दी गई नई सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठने लगे हैं. लोग यह सवाल कर रहे हैं कि अगर इजरायल दूसरी बार कतर पर हमला करता है तो उस सूरत में अमेरिका, कतर की सुरक्षा करेगा और इजरायल पर हमला करेगा? क्योंकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कतर पर हमला करने के बाद धमकी देते हुए कहा था कि उन्हें जब मौका मिलेगा और हमास के सदस्य जिस देश में होंगे वहां पर हमला करेंगे.