US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में नया मोड़ आया है. ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ रोकने का ऐलान किया है, जबकि बातचीत जारी है. हालांकि, होर्मुज की नाकेबंदी बरकरार है, जिससे दबाव और अनिश्चितता दोनों बनी हुई हैं.
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US Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने एक नया मोड़ ले लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज की खाड़ी में फंसे जहाजों को निकालने के लिए चलाए जा रहे ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को फिलहाल रोकने का ऐलान किया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं और एक बड़े समझौते की संभावना जताई जा रही है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बताया कि यह कदम पाकिस्तान समेत कई देशों के आग्रह और अमेरिका की “सैन्य सफलता” के बाद उठाया गया है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अब एक “अंतिम और व्यापक समझौते” की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इस फैसले का मकसद यह देखना है कि क्या बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकल सकता है. लेकिन, ट्रंप ने यह भी साफ किया कि प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोकने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने ईरान पर दबाव कम कर दिया है. होर्मुज की खाड़ी में अमेरिका की नाकेबंदी अब भी जारी रहेगी.
अमेरिका-ईरान युद्ध समाप्त
इस बीच, अमेरिका ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को समाप्त करने की घोषणा की है. यह जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दी. उन्होंने कहा कि अमेरिका अब किसी नए युद्ध की दिशा में नहीं बढ़ना चाहता और कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देना चाहता है. ट्रंप ने ईरान की सैन्य स्थिति को लेकर भी कड़ा बयान दिया. उन्होंने दावा किया कि हालिया संघर्ष में ईरान को भारी नुकसान हुआ है, खासकर उसकी नौसेना को. उनके मुताबिक, ईरान ने छोटे हथियारों और नावों के जरिए हमला किया था, लेकिन अब उसके पास वह क्षमता नहीं बची है.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
वहीं, ट्रंप के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. अमेरिकी कच्चा तेल करीब 2.23 डॉलर गिरकर 100.04 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. यह गिरावट इस संकेत के रूप में देखी जा रही है कि बाजार को अब संभावित शांति समझौते की उम्मीद है. होर्मुज की खाड़ी में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी अब भी बनी हुई है. अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमान, जैसे F-16, इस इलाके में गश्त कर रहे हैं. इसका उद्देश्य एक तरफ समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाए रखना भी है.