Trending Photos
)
Bahrain News Today: विदेश में नौकरी या बेहतर ज़िंदगी की तलाश में निकलीं दो आंध्र प्रदेश की महिलाएं बहरीन की सड़कों और अस्पतालों में दम तोड़ गईं, पर अफसोस उनकी मौत के बाद भी उन्हें अपने परिवार की चिता की गर्मी नसीब नहीं हुई. सालों तक उनके शव मुर्दाघर में पड़े रहे, क्योंकि कोई अपनापन जताने वाला नहीं आया. लेकिन आखिरकार, मानवीयता की मिसाल बने कुछ हाथ आगे बढ़े और उन्हें दी गई वो विदाई, जिसका वह पांच साल से इंतजार कर रही थीं.
यह घटना है मिडिल ईस्ट के छोटे से देश बहरीन की मनामा शहर की, जहां बीते बुधवार (20 अगस्त) को एक भावुक क्षण देखने को मिला, जब पांच साल से मुर्दाघर में पड़े दो भारतीय महिलाओं के शवों का आखिरकार पूरे धार्मिक रीति रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. इन महिलाओं का ताल्लुक आंध्र प्रदेश से था.
इन महिलाओं की मौत साल 2020 में अल-अलग वजहों से बहरीन में हुई थी. मृतक महिलाओं में से एक हैं 29 साल की सत्यवती कोराडा, जो आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले से थीं. सत्यवती कोराडा की मौत एक सड़क हादसे में हुई थी. जबकि, दूसरी महिला का नाम पैदम्मा पल्लवकाडा था. पैदम्मा पल्लवकाडा का ताल्लुक आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले से था और उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी.
सबसे अफसोसनाक और हैरान करने वाली बात ये रही कि उनके परिवार या रिश्तेदारों में से कोई भी इतने सालों तक उनके शवों को लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. इतने लंबे इंतजार के बाद बहरीन सरकार, भारतीय दूतावास और आंध्र प्रदेश के अधिकारियों के समन्वय से उनके परिवारों से सहमति ली गई, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूरा किया गया.
सियासत में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस मानवीय कार्य को अंजाम देने में सामाजिक कार्यकर्ता डीवी शिव कुमार ने अहम भूमिका निभाई. उन्होंने मनामा के एक हिंदू श्मशान घाट पर स्थानीय संगठनों और आंध्र प्रदेश एनआरटीएस इंस्टीट्यूट की मदद से यह अंतिम संस्कार पूरा कराया. शिव कुमार ने बहरीन सरकार और भारतीय दूतावास के प्रयासों की जमकर तारफी की और कहा कि "यह सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी थी, जिसे निभाना जरूरी था."
मिडिल ईस्ट और मुस्लिम जगत की ऐसी ही खबरों के लिए विजिट करें https://zeenews.india.com/hindi/zeesalaam