Waziristan Bomb Blast: आतंकवादी समूह वज़ीरिस्तान में फिर से अपनी जड़ें जमा रहे हैं, जबकि सरकार की निष्क्रियता उनके हौसले बुलंद कर रही है. इस बीच आतंकियों ने मस्जिद में बम धमाका कर दिया है.
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Pakistan News: पाकिस्तान के निचले दक्षिण वज़ीरिस्तान में बिरमल तहसील के आज़म वारसाक बाज़ार इलाके में एक मस्जिद में भीषण बम विस्फोट हुआ. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के एक नेता बाल-बाल बच गए. डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसे के संचालक मौलाना सखी वज़ीर इस विस्फोट में बाल-बाल बच गए. विस्फोट के समय वह मस्जिद में अपने कमरे में दाखिल हो रहे थे, जिससे उन्हें मामूली चोटें आईं.
डॉन के मुताबिक, विस्फोट सुबह करीब 10 बजे हुआ, जिससे मस्जिद की दीवारों को आंशिक नुकसान पहुंचा. ज़िला पुलिस अधिकारी मोहम्मद ताहिर शाह ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि अज्ञात आतंकवादियों ने रात भर विस्फोटक उपकरण लगाया था. उन्होंने कहा, "मौलाना वज़ीर के कमरे में कदम रखते ही आईईडी फट गया."
पुलिस की शुरुआती जांच से पता चलता है कि इसमें रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था. विस्फोट से इलाके में व्यापक दहशत फैल गई, जहां निवासी बिगड़ती सुरक्षा स्थितियों को लेकर चिंतित हो गए हैं. जिले में जेयूआई-एफ के कई नेताओं को पहले भी निशाना बनाया जा चुका है. जिला प्रमुख मौलाना अब्दुल्ला और एक अन्य स्थानीय मौलवी, मौलाना शहजादा, दोनों पहले हुए हमलों में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उनमें से एक का अभी भी मुल्तान के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है.
एक आधिकारिक बयान में जेयूआई-एफ ने बम विस्फोट की कड़ी निंदा की, इसे एक कायराना आतंकी कृत्य बताया और राज्य पर धार्मिक हस्तियों की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया. पार्टी ने कहा कि विद्वानों और मौलवियों पर बढ़ते हमले एक खतरनाक सुरक्षा चूक को दर्शाते हैं और अधिकारियों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया.
ग्रामीणों ने कहा कि बिरमल तहसील और आसपास के इलाकों में पिछले एक साल में आतंकवादी गतिविधियों में तेजी देखी गई है, जिसमें अपहरण, लक्षित हत्याएं और सुरक्षा बलों पर हमले शामिल हैं. व्यापार मालिकों का कहना है कि लगातार विस्फोटों और गोलीबारी के कारण शाम के बाद बाजार खाली हो गए हैं, जिससे आजीविका को नुकसान पहुंचा है और नागरिकों में भय गहरा गया है, जैसा कि डॉन ने उजागर किया है.
आतंकवादी समूह वज़ीरिस्तान में फिर से अपनी जड़ें जमा रहे हैं, जबकि सरकार की निष्क्रियता उनके हौसले बुलंद कर रही है. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, यह ताज़ा हमला पाकिस्तान की अपने अशांत कबायली ज़िलों में चरमपंथी हिंसा को रोकने में बढ़ती अक्षमता को दर्शाता है.