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Syria Druze Sunni Conflict: सीरिया में पिछले कुछ महीनों में ड्रूज और सुन्नी समुदायों के बीच तनाव चल रहा है. इस बीच कुछ दिन पहले दोनों समुदाय के बीच हिंसा भड़क उठी, जिसमें कम से कम 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. इस दौरान, इज़राइल ने सीरिया के ड्रूज़ समुदाय के समर्थन वाले सैन्य अड्डे और रक्षा मंत्रालय पर ड्रोन हमला किया. इस हमले में कई लोग मारे गए हैं. इस हमले की वजह से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है और तीसरे विश्व युद्ध की आशंका जताई जा रही है.
इस बीच सबसे ज्यादा किसी बात की चर्चा हो रही है तो वह ड्रूज मुसलमानों की चर्चा हो रही है. लोगों के मन में सवाल है कि क्या ड्रूज़ वास्तव में मुसलमान हैं या नहीं, और उनकी लड़ाई सुन्नी समुदाय के क्यों हैं. अगर आप इन सवालों के जवाब नहीं जानते हैं तो आइए हम विस्तार से बताते हैं.
ड्रूज़ कौन हैं?
ड्रूज़ एक धार्मिक समुदाय है जिसकी जड़ें इस्लाम की इस्माइली शाखा से जुड़ी हैं, लेकिन समय के साथ यह एक अलग धर्म बन गया. ड्रूज़ खुद को "मुवाहिदुन" यानी एकेश्वरवादी कहते हैं और अल्लाह में आस्था रखते हैं, लेकिन नमाज़, रोज़ा या हज जैसी पारंपरिक इस्लामी प्रथाओं का पालन नहीं करते.
हालांकि ड्रूज़ समुदाय की उत्पत्ति इस्लाम से हुई है, लेकिन आज यह समुदाय खुद को एक स्वतंत्र धार्मिक पहचान के रूप में देखता है. ड्रूज़ अल्लाह पर यकीन रखते हैं, लेकिन कुरान और इस्लाम के पांच फर्ज (नमाज़, रोज़ा, हज आदि) का अपने तरीके से पालन करते हैं या पूरी तरह से नहीं मानते. इसीलिए सुन्नी और शिया मुसलमान अक्सर ड्रूज़ को गैर-मुस्लिम मानते हैं.
ड्रूज़ और सुन्नी के बीच संघर्ष क्यों?
सीरिया में सुन्नी और ड्रूज समुदायों के बीच तनाव में धार्मिक और क्षेत्रीय कारण अहम भूमिका निभाते हैं. सबसे पहले धार्मिक मतभेद इस संघर्ष की जड़ में हैं. सुन्नी मुसलमान ड्रूज की मान्यताओं को इस्लाम से अलग या गैर-इस्लामी मानते हैं, क्योंकि ड्रूज नमाज़, रोज़ा और हज जैसे पारंपरिक इस्लामी रीति-रिवाजों का पालन नहीं करते. दूसरी तरफ, ड्रूज अपनी एक अलग धार्मिक पहचान मानते हैं, जिससे दोनों समुदायों के बीच धार्मिक दूरी और बढ़ जाती है.
दूसरी ओर, क्षेत्रीय सुरक्षा और नियंत्रण का मुद्दा भी गंभीर है. सीरिया का दक्षिणी क्षेत्र, स्वैदा, द्रुज़ बहुल क्षेत्र है लेकिन इसके आसपास के इलाकों में कई सुन्नी चरमपंथी समूह सक्रिय हैं. द्रुज़ समुदाय इनसे ख़तरा महसूस करता है, इसलिए वे स्थानीय सुरक्षा बल और मिलिशिया बनाते हैं. इन मिलिशियाओं की सुन्नी समूहों के साथ अक्सर हिंसक झड़पें होती रही हैं, जिससे संघर्ष और बढ़ रहा है.
क्या ड्रूज़ नमाज़ पढ़ते हैं?
ड्रूज़ समुदाय पारंपरिक नमाज़ नहीं पढ़ता. उनकी पूजा-अर्चना और धार्मिक ग्रंथ गुप्त रखे जाते हैं. आमतौर पर केवल उनके धार्मिक नेता ही इन ग्रंथों को पढ़ते हैं और आम सदस्य केवल दर्शन और नैतिक मूल्यों को ही अपनाते हैं. यही कारण है कि दोनों समुदायों के बीच लगभग हर दिन संघर्ष होता रहता है.