)
Austria News Today: अमेरिका, यूरोप समेत कई मुल्कों में दक्षिणपंथी संगठन लगातार मुसलमानों के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं. यूरोप के कई देशों में दक्षिणपंथी सरकारों ने हिजाब और नकाब पर बैन लगाना शुरू कर दिया है. वहीं, अब कथित लोकतंत्र, अमन और शांति का अलमबरदार होने का दावा करने वाला मुल्क ऑस्ट्रिया में दक्षिणपंथी सरकार ने एक मजहबी और क्षेत्रीय के आधार पर लोगों को टार्गेट करना शुरू कर दिया है.
ऑस्ट्रिया ने मंगलवार (21 अक्टूबर) को पहली बार एक अफगान नागरिक को उसके देश वापस भेज दिया है. यह घटना चार साल बाद हुई है, जब तालिबान ने अमेरिका समर्थित समर्थित सरकारों को बेदखल कर अफगानिस्तान में सत्ता में वापसी की. बताया गया कि यह तालिबान के शासन में आने के बाद अफगान नागरिक की पहली देश निकाला की कार्रवाई है.
राजधानी वियना में सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार ने कहा है कि आने वाले समय में और भी अफगान नागरिकों को देश से निकाला जाएगा. सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का नेतृत्व कंजरवेटिव (रूढ़िवादी) ऑस्ट्रियन पीपल्स पार्टी कर रही है, सरकार ने गैरकानूनी प्रवासन के खिलाफ कार्रवाई को अपनी पहली तरजीह बताई है.
ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "आज सुबह एक गंभीर अपराध करने वाले शख्स को काबुल निर्वासित किया गया. यह 2021 के बाद किसी अफगान नागरिक की पहला देश निकाला (deportation) की कार्रवाई है." चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने आगे कहा, "ऑस्ट्रिया इससे एक स्पष्ट संदेश दे रहा है, जो भी शख्स अपराध करता है तो वह इस देश में रहने का अधिकार खो देता है. अपराध करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा."
इससे पहले जुलाई में ऑस्ट्रिया यूरोपीय संघ का पहला देश बना था जिसने सीरिया के नागरिकों को वापस उनके देश भेजा, जबकि वहां अब भी अस्थिरता बनी हुई है और आए दिन इजरायली फौज के साथ कई मिलिशिया हमले कर रहे हैं. उस समय मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम पर सवाल उठाया था और कहा था कि अभी यह तय करना जल्दबाजी होगी कि वहां लोगों की वापसी सुरक्षित है या नहीं है.
ऑस्ट्रिया कई महीनों से यह कहता आ रहा है कि वह अफगान नागरिकों की भी वापसी की प्रक्रिया शुरू करना चाहता है, भले ही इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध हो. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक बयान जारी करते हुए इस फैसले की आलोचना की. एमनेस्टी ने कहा, "अफगानिस्तान अब भी दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक है. कोई भी देश अगर लोगों को ऐसे देश में निर्वासित करता है जो अपने ही नागरिकों के खिलाफ अपराध कर रहा है, तो वह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहा है. मानवाधिकारों के इस धोखे को तुरंत रोका जाना चाहिए."
ऑस्ट्रिया में शरण लेने वालों में सबसे ज्यादा लोग सीरिया और अफगानिस्तान से हैं. सरकार ने कहा है कि शुरुआती चरण में जिन लोगों को देश से निकाला जाएगा, वे मुख्य रूप से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले शरणार्थी होंगे. चांसलर स्टॉकर ने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय, जो गेरहार्ड कार्नर के अधीन है, अब और ज्यादा लोगों की देश निकाला की तैयारी कर रहा है.