Ayatollah Ali Khamenei on Iran Protest and Trump Threatens: ईरान में 12 दिनों से जारी उग्र प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने विदेशी दखल का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने इसके लिए ईरान में हो रहे प्रदर्शन और हिंसा के लिए डोनाल्ड को जिम्मेदार ठहराया. सरकार ने जारी शांति व्यवस्था कायम करने के लिए देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं.
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Iran Protest Update: ईरान में इस समय विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ता जा रहा है. भारत समेत दुनिया के कई देशों ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. इस बीच शुक्रवार (9 जनवरी) को जुमे की नमाज के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने विरोध प्रदर्शन और दंगों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आड़े हाथों लिया.
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस मौके पर कहा कि हमारा देश विदेशियों के भाड़े का सिपाही बनने को बर्दाश्त नहीं करेगा और न ही करता है. अमेरिकी और इजरायली साजिश की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि आप चाहे जो भी हों, जैसे ही आप किसी विदेशी के लिए भाड़े के सिपाही बनते हैं, या किसी विदेशी के लिए काम करते हैं, तो देश इस हालत में आपको माफ नहीं करेगा.
Iran's Khamenei:
Our nation does not tolerate mercenarism for foreigners.
Whoever you may be, once you become a mercenary for a foreigner, once you work for a foreigner, the nation considers you rejected.
As for that fellow (Trump) who sits there with arrogance and pride,… pic.twitter.com/rAddknBwOH
— Clash Report (@clashreport) January 9, 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया धमकी पर अयातुल्ला अली खामेनेई ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वह शख्स (ट्रंप), जो वहां बैठकर घमंड और अहंकार में डूबकर पूरी दुनिया पर फैसले सुनाता है, उसे यह भी जान लेना चाहिए कि आम तौर पर दुनिया के तानाशाह और घमंडी ताकतें जैसे फ़िरौन, नमरूद, रज़ा ख़ान, मोहम्मद रज़ा और उसके जैसे लोग ठीक उसी समय गिराए गए, जब उनका अहंकार चरम पर था.
12 दिनों से जारी है विरोध प्रदर्शन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों ने उग्र रूप ले लिया है और हालात ऐसे हैं कि ईरान का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट गया है. पिछले 12 दिनों से लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं, जिससे सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव गहराता जा रहा है.
इसी बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे किसी दूसरे देश के इशारों पर न चलें. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश के भीतर हो रही घटनाओं के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
रॉयटर्स के मुताबिक, शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन और हिंसा को काबू में करने के लिए ईरानी अधिकारियों ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं. सामने आए वीडियो फुटेज में यह देखा गया कि कई शहरों की सड़कों पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां इमारतों और गाड़ियों में आग लगाई गई है.
एक टेलीविजन संबोधन में अयातुल्ला अली खामेनेई ने किसी भी तरह से पीछे हटने से इनकार करते हुए प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी प्रवासी विपक्षी गुटों और संयुक्त राज्य अमेरिका के इशारे पर काम कर रहे हैं. वहीं, कुछ मानवाधिकार संगठनों ने दक्षिणी ईरान में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग की खबरें भी दी हैं.
ट्रंप पर खामेनेई ने साधा निशाना
खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों की तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि "वे किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं." सरकारी टीवी पर प्रसारित इस बयान में उनका सीधा निशाना अमेरिका के बड़बोले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर था." ट्रंप ने हाल ही में धमकी दी थी कि अगर ईरान की सरकार ने प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा.
ईरान इस समय खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामिक सरकार के खिलाफ व्यापक जनाक्रोश का सामना कर रहा है. बताया जा रहा है कि इस प्रदर्शन के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ है. इससे पहले ईरान के निर्वासित कथित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने गुरुवार और शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे प्रदर्शन का आह्वान किया था. इससे इन प्रदर्शन के पीछे अमेरिका और इजरायल के हाथ होने को बल मिलता है, क्योंकि रजा पहलवी इन दोनों देशों के कट्टर समर्थक हैं.
प्रदर्शनों में 40 से ज्यादा लोगों की मौत
बता दें, 8 जनवरी की रात ईरान में विरोध प्रदर्शनों ने और तेज रफ्तार पकड़ ली. इसके बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली सरकार ने देश में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल सेवाएं बंद कर दीं. देश की न्यायपालिका और सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारियों ने 'आजादी-आजादी' के नारों के बीच सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है. अब तक इन प्रदर्शनों में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
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