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Bangladesh Political Crisis: बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. बांग्लादेश के चुनाव आयोग (EC) ने बुधवार (17 सितंबर) को ऐलान किया कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना का राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID कार्ड) लॉक कर दिया गया है. इसका मतलब है कि अब वह अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगी. चुनाव आयोग के इस ऐलान के बाद बांग्लादेश में सियासी रस्साकशी तेज हो गई है.
चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने ढाका स्थित निर्वाचन भवन में मीडिया से बातचीत में कहा, "जिसका भी NID कार्ड लॉक हो जाता है, वह विदेश से वोट नहीं डाल सकता. शेख हसीना का भी NID लॉक कर दिया गया है." हालांकि उन्होंने किसी और का नाम नहीं लिया, लेकिन बांग्लादेश की कई प्रमुख मीडिया संस्थानों ने उनके परिवार के दूसरे सदस्यों की भी NID लॉक करने का दावा किया है.
मीडिया रिपोर्ट ने अनाम चुनाव आयोग के अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि शेख हसीना की छोटी बहन शेख रेहाना, बेटे सजीब वाजेद जॉय और बेटी सैमा वाजेद पुतुल के NID भी 'लॉक या ब्लॉक' कर दिए गए हैं. यही नहीं रेहाना के बच्चे तुलिप रिज़वाना सिद्दीक, अजमीना सिद्दीक और भांजे रदवान मुजीब सिद्दीक बॉबी की आडी भी ब्लॉक होने की बात कही गई.
इसी तरह शेख हसीना के शौहर और पूर्व सुरक्षा सलाहकार रिटायर्ड मेजर जनरल तरीक अहमद सिद्दीकी, उनकी बीवी शाहीन सिद्दीकी और बेटी बुशरा सिद्दीकी को भी मतदान से रोक दिया गया है. चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग न्याय से बचने या दूसरी वजहों से विदेश भागे हैं, वे तभी वोट डाल सकते हैं जब उनका NID कार्ड एक्टिव होगा,
गौरतलब है कि शेख हसीना की आवामी लीग सरकार 5 अगस्त 2024 को छात्र-आंदोलन की हिंसक लहर के बाद सत्ता से बेदखल हो गई थी. इस दौरान उन्हें भारत भागना पड़ा. इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार का पद संभाला और आवामी लीग की सरगर्मियों पर रोक लगा दी. हसीना और उनकी पार्टी के सीनियर नेताओं पर कई गंभीर अपराधों के आरोप में केस दर्ज हैं, जिनमें मानवता के खिलाफ अपराध भी शामिल हैं.
फिलहाल शेख हसीना पर बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल में गैरहाजिरी में मुकदमा चल रहा है. अभियोजकों ने उन पर जुलाई 2024 के विद्रोह के दौरान कथित अत्याचारों के लिए फांसी की सजा की मांग की है. इस बीच आवामी लीग के ज्यादातर सीनियर नेता अंडर ग्राउंड हो चुके हैं या निर्वासन में हैं. विरोध प्रदर्श के दौरान हिंसक भीड़ ने उनकी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया, जिनमें ढाका के धानमंडी स्थित शेख मुजीबुर रहमान (हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक) का ऐतिहासिक घर भी शामिल है.