Bangladesh General Election 2026: बांग्लादेश में फरवरी के महीने में आम चुनाव होने हैं. इसको लेकर एमिनेंस एसोसिएट्स फॉर सोशल डेवलपमेंट द्वारा ओपिनियन पोल किया गया. इस ओपिनियन पोल में सामने आया है कि बांग्लादेश के 70 फीसदी लोग BNP को समर्थन कर रहे हैं और 19 फीसदी लोग जमात-ए-इस्लामी को समर्थन कर रहे हैं. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Bangladesh General Election 2026: बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट होने के बाद से वहां पर मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार चल रही है. आगामी 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में आम चुनाव होने हैं. शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद उनकी पार्टी अवामी लीग की स्थिति अच्छी है. ऐसे में बांग्लादेश में दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियां चुनाव लड़ेंगी. पहला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) दूसरा जमात-ए-इस्लामी. आगमी आम चुनाव को लेकर एमिनेंस एसोसिएट्स फॉर सोशल डेवलपमेंट द्वारा एक चौंकाने वाला ओपिनियन पोल किया गया है, जिसमें BNP को बांग्लादेश आम चुनाव में बहुमत मिलती दिख रही है.
पिछले महीने इसी संस्था द्वारा ओपिनियन पोल किया गया था, जिसमें दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर दिखाई जा रही थी. लेकिन इस बार के ओपिनियन पोल में BNP ने 70 फीसदी लोगों के साथ जमात को पीछे छोड़ दिया है. लोगों का कहना है कि वे मरहूम खालिदा जिया की पार्टी को वोट देंगे. वहीं जमात को सिर्फ 19 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला.
एमिनेंस एसोसिएट्स फॉर सोशल डेवलपमेंट के एक ओपिनियन पोल के मुताबिक, बांग्लादेश में पिछले साल हुई हिंसा और शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद बनी नेशनल सिटिजन पार्टी को 2.9 फीसदी लोगों का ही समर्थन मिला है. पोल देखने वालों ने कहा कि BNP को कई वजहों से लोगों का समर्थन मिल रहा है. एक पहलू ये भी है कि पूर्व पीएम खालिदा जिया की मौत की वजह से BNP को लोगों का भावनात्मक समर्थन भी मिल रहा है. बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मौत 30 दिसंबर 2025 को 80 वर्ष की उम्र में हुई.
BNP को बांग्लादेश की जनता का भरपूर समर्थन मिलने का दूसरा पहलू ये है कि जिया उर रहमान के बेटे तारिक रहमान की लंदन से बांग्लादेश वापसी होने से पार्टी को मजबूती मिली है. तारिक अपनी वापसी के बाद से ही चुनावी मैदान में उतर चुके हैं, और इसका असर लोगों पर देखने को मिल रहा है.
इसी ओपिनियन पोल में यह भी बताया गया कि शेख हसीना के कई समर्थक अवामी लीग छोड़कर अब BNP का साथ दे रहे हैं. हालांकि, इसकी वजह चुनाव में अवामी लीग की अनुपस्थिति भी हो सकती है. विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि अवामी लीग को चुनाव लड़ने से बैन कर दिया गया है, और शायद इसी वजह से उसके समर्थक बीएनपी के साथ खड़े हैं.
इसका एक पहलू ये भी है कि बीते एक साल के अंदर ना जाने कितने ही अवामी लीग के समर्थकों और हसीना के करीबी लोगों को निशाना बनाया जा चुका है. इसके कई मामले भी बीते साल सामने आए. इसलिए शायद किसी तरह की हिंसा और परेशानी का शिकार होने से बचने के लिए BNP एक अच्छा विकल्प है.
सर्वे के मुताबिक, अवामी लीग के 60 फीसदी समर्थक अब कहते हैं कि वे बीएनपी को वोट देंगे. अवामी लीग के 25 फीसदी समर्थकों ने कहा कि वे जमात का साथ देंगे. पोल में कहा गया कि जातीय पार्टी को सिर्फ 1.4 फीसदी लोगों का समर्थन मिला है.