Muhammad Yunus on Sheikh Hasina: बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस विरोध को खत्म करने के लिए हरसंभव कोशिश की. इसके बाद विरोध ने हिंसक रूप ले लिया और इस हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई.
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Muhammad Yunus on Sheikh Hasina: बांग्लादेश में छात्र सरकारी नौकरियों में रिजर्वेशन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस विरोध को खत्म करने के लिए हरसंभव कोशिश की. इसके बाद विरोध ने हिंसक रूप ले लिया और इस हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पीएम कार्यालय में घुस गए और जमकर उत्पात मचाई, जिसके फौरन बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा, फिलहाल शेख हसीना भारत में रह रही है.
अंतरिम सरकार ने लिया बड़ा फैसला
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद भी बांग्लादेश में हालात नहीं सुधरे हैं. ऐसे में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के खिलाफ एक के बाद एक कई मामले दर्ज किए. अब बाग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रशासन के दौरान किए गए कथित अत्याचारों के दस्तावेजों को ‘‘सावधानीपूर्वक संरक्षित’’ करने का आह्वान किया है.
‘ढाका ट्रिब्यून’ अखबार की खबर के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के साथ रविवार को हुई बैठक के दौरान यूनुस ने इस बात पर जोर दिया कि उचित अभिलेखीय प्रणाली के बिना ‘‘सच्चाई जानना और न्याय सुनिश्चित करना मुश्किल है."
शेख हसीना सरकार में हुआ मानवाधिकार का हनन
मुख्य सलाहकार की ‘प्रेस शाखा’ द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र की ‘रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर’ ग्वेन लुईस और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ हुमा खान के साथ बातचीत के दौरान मुख्य सलाहकार ने शापला चत्तर में प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई, डेलवर हुसैन सईदी के फैसले के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता और सालों की कथित न्यायेतर हत्याओं का हवाला दिया.
इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने मानवाधिकारों के हनन के दस्तावेजीकरण में बांग्लादेश की सहायता करने की अपनी इच्छा की तस्दीक की. तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण में संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञता की पेशकश करते हुए लुईस ने कहा, ‘‘यह (अत्याचारों के शिकार लोगों को) मरहम लगाने और सत्य-निर्माण की एक प्रक्रिया है.’’
यूनुस मानवाधिकार की रिपोर्ट की तारीफ
यूनुस ने जुलाई-अगस्त 2024 के विद्रोह के बाद मानवाधिकार उल्लंघन पर संगठन की हालिया तथ्यान्वेषी रिपोर्ट की भी सराहना की, जिसके कारण अवामी लीग के 15 साल के शासन का खत्मा हो गया और हसीना पलायन कर भारत चली गईं. लुईस के अनुसार, मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क पांच मार्च को जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के सत्र में दस्तावेज पेश करेंगे.
यूनुस सरकार ने क्या कहा?
यूनुस ने कहा, ‘‘हमें बहुत खुशी है कि संयुक्त राष्ट्र ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की है, यह समय पर हुआ.’’ चर्चा में रोहिंग्या शरणार्थियों की दुर्दशा पर भी चर्चा हुई, जिसमें लुईस ने घटती अंतरराष्ट्रीय सहायता पर चिंता व्यक्त की. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस 13 से 16 मार्च तक बांग्लादेश का दौरा करेंगे. लुईस ने उम्मीद जताई कि गुतारेस की यह यात्रा शरणार्थी संकट पर विश्व का ध्यान आकर्षित करेगी. लुईस ने कहा, ‘‘हम धन की स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं.’’ उन्होंने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को खाद्य आपूर्ति और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रति माह 150 लाख अमरीकी डॉलर की आवश्यकता है.