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Bangladesh News: साल 2024 में बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार के खिलाफ वहां के छात्रों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था, इस प्रदर्शन को दबाने के लिए शेख हसीना ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियाँ चलवाईं. इस घटना के बाद शेख हसीना के खिलाफ पूरे बांग्लादेश में प्रदर्शन शुरू हो गए और उन्हें देश छोड़कर जाना पड़ा. इस मामले को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ ट्रायल चल रहा था, जो पूरा हो गया है. अबद इस मामले में ICT 13 नवंबर को फैसला सुनाएगा. शेख हसीना के बांग्लदेश छोड़ने के बाद मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में बांग्लादेश में अंतरिम सरकार चल रही है.
दरअसल, शेख हसीना पर आरोप है कि उन्होंने अपने शासन के दौरान विरोधियों को गायब करवाया और अपनी सत्ता को बचाने के लिए प्रदर्शनकारी छात्रों का दमन किया, जिसे बांग्लादेश में मानवता के खिलाफ अपराध बताया जाता है. इस मामले में शेख हसीना के खिलाफ ICT में ट्रायल चल रहा था, जो अब पूरा हो गया है.
वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में उनके वकील मोहम्मद आमिर हुसैन ने कहा कि साल 2024 में प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल करने के लिए की गई कार्रवाई को मानवता के खिलाफ अपराध नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि मानवता के खिलाफ अपराध के लिए किसी समूह या समुदाय के खिलाफ जघन्य अपराध या उनकी सामूहिक हत्या होनी चाहिए, जैसे हिटलर ने यहूदियों के साथ किया था. उन्होंने कहा कि शेख हसीना ने ऐसा नहीं किया, इसलिए शेख हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप सही नहीं है.
शेख हसीना के वकील मोहम्मद आमिर ने यह भी कहा कि शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भागी नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा करने पर मजबूर किया गया. मोहम्मद आमिर ने कहा कि शेख हसीना छिपकर नहीं गई, बल्कि वह हेलिकॉप्टर से गई थीं.
गौरतलब है कि इससे पहले भी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 30 नेता और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ बांग्लादेश की कोर्ट दो अलग-अलग मामले में सजा सुना चुकी है. इंसानियत
के खिलाफ अपराध के दो अलग-अलग मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत पूर्व होम मिनिस्टर असदुज्जमां खान, रिटायर्ड मेजर जनरल तारिक अहमद सिद्दीकी, जो पूर्व प्रधानमंत्री के डिफेंस एडवाइजर थे, और पूर्व पुलिस चीफ बेनजीर अहमद समेत 30 आरोपियों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किए गए थे. ICT ने आदेश दिया कि आरोपियों को 22 अक्टूबर तक गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया जाए.