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Bangladesh News: शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. यूनुस सरकार के खिलाफ विद्रोह की लपटें रोजाना भड़क रही हैं. इस बीच बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने चेतावनी दी है कि अगर यूनुस प्रशासन का कोई भी सदस्य किसी खास राजनीतिक दल के पक्ष में काम करता है, तो लोग सड़कों पर उतर आएंगे.
ढाका में बैतुल मुकर्रम राष्ट्रीय मस्जिद के उत्तरी द्वार पर एक रैली को संबोधित करते हुए, जमात के सहायक महासचिव रफीकुल इस्लाम खान ने कहा, "अगर कोई सलाहकार, सचिव, चुनाव आयुक्त या पुलिस अधिकारी पार्टी के आदमी की तरह काम करना चाहते हैं, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. हर कोई जानता है कि प्रशासन में उन लोगों का क्या हुआ जिन्होंने पार्टी के पिट्ठू की तरह काम किया. अगर कोई सरकारी पद पर बैठा व्यक्ति किसी राजनीतिक दल के लिए काम करता है, तो लोग यूं ही चुप नहीं बैठेंगे."
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह रैली सोमवार को जमात और 7 दूसरे इस्लामी दलों के एक साथ चल रहे आंदोलन के चौथे चरण के हिस्से के रूप में आयोजित की गई थी, जिसमें उनकी पांच सूत्री मांगें शामिल हैं, जिनमें जुलाई चार्टर पर नवंबर में जनमत संग्रह और आगामी राष्ट्रीय चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत कराना शामिल है. पांच सूत्री मांगों को दोहराते हुए रफीकुल ने कहा, "अगर ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो जमात का आंदोलन जारी रहेगा."
दूसरी तरफ जमात और राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के बीच जनसंपर्क प्रणाली की मांग को लेकर बढ़ते तनाव के बीच, जमात के महासचिव गुलाम पोरवार ने एनसीपी नेताओं को इस्लामी पार्टी के साथ प्रतिस्पर्धा करने से बचने की सलाह दी. यह टिप्पणी एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम द्वारा अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर यह कहने के बाद आई है कि जमात द्वारा शुरू की गई 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व आंदोलन की मांग एक सोची-समझी राजनीतिक धोखाधड़ी के अलावा और कुछ नहीं है.
बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली दैनिक प्रोथोम अलो ने पोरवार के हवाले से कहा, "आप एक नए छात्र-नेतृत्व वाले राजनीतिक संगठन हैं। जमात-ए-इस्लामी से प्रतिस्पर्धा करने के लिए आपको अभी लंबा रास्ता तय करना है. जन्म के तुरंत बाद अपने पिता से प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश न करें." उन्होंने एनसीपी पर निशाना साधते हुए कहा, "हम अभी आपको उतनी गंभीरता से नहीं लेते. अभी हमारी आलोचना मत कीजिए. आपके सामने अभी लंबा रास्ता है."
बांग्लादेश अगले साल होने वाले चुनाव से पहले बढ़ती अनिश्चितता और राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है. जिन पार्टियों ने पहले शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए यूनुस के साथ मिलकर काम किया था, वे अब सुधार प्रस्तावों को लेकर आपस में भिड़ गई हैं.
इनपुट-IANS